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तनाव मुक्ति के लिए करें ये उपाय

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मन की शांति

सारा खुशीयों का खेल मानव के मन पर निर्भर होता है। हम जैसा जीवन जीते हैं, जो भी करते हैं, मन के आधार और उसके अनुसार ही तय होता है।हम पैरों से चलते दिखाई देते हैं, परंतु चलना हमारे मन के राजी होने या निर्देश पर ही होता है। मन धूरी है ,जिस पर शरीर टिका रहता है ।जैसा हमारा मन होता है, वैसा ही हमारा जीवन होता है इसलिए कहा गया है मन के जीते जीत है ,मन के हारे हार।।

मन का नियंत्रण

हमारे मन की स्थिति पूर्णतया हमारे हाथ में होती है और दूसरे इंसान के मन स्थिति उसके मन पर होती है। इसीलिए हम उसे मन की पर स्थिति या परिस्थिति कहते हैं, जो पूर्णतया सामने वाले के नियंत्रण में होती है। पर स्थिति को बदलना हमारे नियंत्रण के बाहर होता है, यह बात हमें समझ लेनी चाहिए। हमारा मन ही सिर्फ हमारे नियंत्रण में होता है, इसे ही हमें अपने वश में रखना है,इसे ही समझना, इससे कार्य करवाना, भोजन देकर इसे तंदुरुस्त रखना हमें सीखना है, जिससे मन की शांति और खुशी निरंतर बनी रहती है।

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तनाव क्या है ? 

जब आप तनाव में होते हैं, तब आपकी भौहें चढ़ जातीं हैं। जब आप इस तरह त्यौरी चढ़ाते हैं, तब आपके चेहरे की 72 नसें और माँस-पेशियां उपयोग में लाते हैं। लेकिन जब आप मुस्कुराते हैं तब उन में से केवल 4 का उपयोग करते हैं।अधिक कार्य का अर्थ है अधिक तनाव। तनाव आपकी मुस्कान को भी गायब कर देता है। आपकी बॉडी लेंग्वेज आपकी मानसिक स्थिति और शारीरिक तंत्र की उर्जा का संकेत दे देती है।

हम एक उर्जा के बादल में हैं, जिसे चेतना कहते हैं। यह एक मोमबत्ती और बाती जैसा है। जब आप मोमबत्ती पर माचिस की तीली लगाते हैं तो बाती पर ज्योत प्रकट होती है। मोमबत्ती में हाईड्रोकार्बन है। लेकिन जब उसे प्रज्ज्वलित किया जाता है, तब ज्योति केवल उसकी चोटी पर टिमटिमाती है। इसी तरह हमारा शरीर मोमबत्ती की बाती की तरह है और इसके आसपास जो है वह चेतना है, जो हमें जीवित रखती है। तो हमें अपने मन और आत्मा का ध्यान रखना है।

हमारे अस्तित्व के 7 स्तर हैं – शरीर, श्वास, मन, बुद्धि, स्मृति, अहम् और आत्मा। मन में विचार और अनुभूति की समझ निरंतर बदलते रहते हैं। आत्मा हमारी अवस्था और अस्तित्व का सूक्ष्मतम पहलू है। आत्मा, मन और शरीर को जोड़ती है। वह हमारी सांस है।

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