यह रहा आपके मूल श्लोक —
“कालान्तरातीतममलत्वरूपं, अमलेश्वरं भावये ध्याननिष्ठ।”
— के आधार पर रचित एक पूर्ण संस्कृत ध्यान-गीत, जो भगवान श्री महाकाल अमलेश्वर के निर्गुण, निर्मल और कालातीत रूप की स्तुति करता है।
🔱 श्रीअमलेश्वर ध्यानगीतम्
कालान्तरातीतममलत्वरूपं,
निश्शेषशक्तिं शिवमाद्यमेकम्।
निर्मुक्तमायं निरुपाधिदेहं,
अमलेश्वरं भावये ध्याननिष्ठ॥
सर्पालिवेषं त्रिनयं विशालं,
शान्तप्रभं बिम्बसमानकान्तम्।
लिङ्गात्मरूपं दृढमेकभावं,
अमलेश्वरं भावये ध्याननिष्ठ॥
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नित्यं निराकारमनन्तवृत्तिं,
निर्वाणसौख्यं परब्रह्मरूपम्।
शिवं सतां हृत्सरसीवसन्तं,
अमलेश्वरं भावये ध्याननिष्ठ॥
गङ्गासमानामलधारयुक्तं,
भक्तार्चितं भावविनम्रमूर्तिम्।
कालान्तकं कालभयं हरन्तं,
अमलेश्वरं भावये ध्याननिष्ठ॥
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