श्रीअमलेश्वर वीर-स्तवः
कालातिगं कलुषप्रशमन्यनाथं,
निर्मायिकं वपुर्निखिलं स्वदीपम्।
अम्लानशुद्धमनसं परमेशमीडे,
खारूनतीरनिलयं शरणं प्रपद्ये॥
भीमार्जुनाद्ययुधवीरवरानुकूलं,
द्रौपद्यनन्दनसुतार्तिहरं दयालुम्।
युद्धेऽपि शान्तिधृतमूर्तिममुं नितान्तं,
अमलेश्वरं प्रणामि वीरमुखं पुराणम्॥
अपनी कुंडली पर जवाब चाहिए?
AstroShrine ऐप पर अनुभवी ज्योतिषियों से चैट या कॉल करें — हिंदी और English में।
मौर्यवंशविभवः क्षत्रराजशेखरः सन्,
अशोकनाम जगति शान्तिपथं विधाय।
शमशूलहरमार्गमधिगत्य भूयः,
अमलेशपूजनरतः बभूव धीमान्॥
विक्रमादित्यसम्राज्यशिरोमणिस्तु,
उज्जयिन्यां निवसन् शिवतत्त्वबोधी।
स्वप्नसंकेतवशात् खारुने गतः सन्,
मौनव्रतेन समुपास्य हरं ददर्श॥
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस