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हाथ में पैसे नहीं टिकते

  "दौलत और शोहरत की ख्वाहिश हर इंसान को होती है. लेकिन कई बार कुंडली और ग्रहों की खराब दशा की वजह से कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है. आपने कई बार लोगों को कहते सुना होगा कि उनके हाथ में पैसे नहीं टिकते इसकी वजह यही है. ऐसे में पैसा आता तो है लेकिन टिक नहीं पता. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो बिल्कुल परेशान ना हो. शास्त्रों में इस समस्या से निपटने के लिए अचूक उपाय बताए गए हैं, जिससे आपके पास...
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अकाल मृत्यु के बाद जीवात्मा को मिलने वाली सजा

गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के बाद जीवात्मा को मिलने वाली सजा के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है. जानते हैं गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु को किस श्रेणी में रखा गया है. गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पुराण है, जिसमें मृत्यु के बाद की यात्रा, पाप-पुण्य का फल, यमलोक की व्यवस्था और प्रेत यात्रा का विस्तृत विवरण मिलता है। विशेष रूप से अकाल मृत्यु (जिसे समय से पूर्व मृत्यु कहा गया है) के संबंध में इसमें बहुत ही गंभीर चेतावनियाँ और दंडों का उल्लेख है। 🔱 गरुड़...
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Aaj Ka Rashifal 21 April 2023: आज इन राशियों को व्यावसायिक मामलों में मिलेगी सफलता

Aaj Ka Rashifal 21 April 2023: ज्योतिष शास्त्र में राशिफल को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। राशिफल के अनुसार, आज 21 अप्रैल 2023, शुक्रवार का दिन अधिकांश राशियों के लिए शुभ रहने वाला है। लेकिन कुछ राशियां ऐसी हैं, जिन्हें आज के दिन सतर्क रहने की जरूरत है। तो आइए दैनिक राशिफल से जानते हैं, कैसा रहेगा सभी राशियों के लिए आज का दिन?मेष दैनिक राशिफल (Aries Horoscope Today) अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें , मानसिक स्थिति मजबूत रखें, कुछ चीजों को नजरअंदाज करें, अपने मन में चल रही ...
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रोहिणी व्रत

  रोहिणी व्रत महत्व जैन धर्म शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक महीने के 27 वें दिन रोहिणी नक्षत्र पड़ता है। इस दिन जैन धर्म के अनुयायी रोहिणी व्रत मनाते हैं। रोहिणी व्रत पर परमपूज्य भगवान वासु स्वामी की पूजा-उपासना की जाती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से परमपूज्य भगवान वासु स्वामी की भक्ति करते हैं। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। शुभ मुहूर्त हिन्दू पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को रोहिणी व्रत देर तक 10 बजकर 27 मिनट तक है। अतः साधक अपनी सुविधा अनुसार...
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श्रीहनुमत्प्रशंसनम्

श्रीहनुमत्प्रशंसनम् मुक्तिप्रदानात् प्रतिकर्तृता मे सर्वस्य बोधो भवतां भवेत । हनूमतो न प्रतिकर्तृता स्यात् स्वभावभक्तस्य निरौषधं मे ॥ १॥ मद्भक्तौ ज्ञानपूर्तावनुपधिकबलप्रोन्नतिस्थैर्यधैर्य- स्वाभाव्याधिक्यतेजःसुमतिदमशमेष्वस्य तुल्यो न कश्चित् । शेषो रुद्रः सुपर्णोऽप्युरुगुणसमितौ नो सहस्रांशुतुल्या अस्येत्यस्मान्मदैशं पदमहममुना सार्धमेवोपभोक्ष्ये ॥ २॥ पूर्वं जिगाय भुवनं दशकन्धरोऽसा- वब्जोद्भवस्य वरतो न तु तं कदाचित् । कश्चिज्जिगाय पुरुहूतसुतः कपित्वाद्- विष्णोर्वरादजयदर्जुन एव चैनम् ॥ ३॥ दत्तो वरो न मनुजान् प्रति वानरांश्च धात्रास्य तेन विजितो युधि वालिनैषः । अब्जोद्भवस्य वरमाश्वभिभूय रक्षो जिग्ये त्वहं रणमुखे बलिमाह्वयन्तम् ॥ ४॥ बलेर्द्वास्थोऽहं वरमस्मै सम्प्रदाय पूर्वं तु । तेन मया रक्षोऽस्तं योजनमयुतं पदाङ्गुल्या ॥ ५॥ पुनश्च युद्धाय...
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श्रीवेङ्कटेश क्षमात्रयस्त्रिंशच्छ्लोकी

श्रीवेङ्कटेश क्षमात्रयस्त्रिंशच्छ्लोकी श्रीमद्वेङ्कटशैलवर्यशिखरे रत्नप्रदीपो महां त्रैलोक्यान्धतमिस्र चूषणकृते यो जाज्वलीति स्फुटम् । कल्याणव्रजरोध्यनादिसु दृढाघध्वान्त विध्वंसनं कुर्वन्मङ्गलमातनोतु नितरामात्मानुरूपं स नः ॥ १॥ महामोहमय्यां भवाब्ध्यन्तरीपे महाधन्वमह्यां मदीयं चरन्तम् । मृगं स्वान्तनामानमार्ते परीतं महांहोमृगेन्द्रै रमेशाशु रक्ष ॥ २॥ प्रभो वेङ्कटेश प्रभा भूयमी ते तमः सञ्छिनर्त्ति प्रदेशे ह्यशेषे । अहो मे हृदद्रेर्गुहागूढमन्धन् तमो नैति नाशं किमेतन्निदानम् ॥ ३॥ अथावैमि वैतन्निदानं हृदाहं सहा त्वत्सपर्याविपर्यासहेतौ । कुमार्गे महामोहमार्गे सनिष्ठः सुनिष्ठातृभावं प्रभो यद्वहामि ॥ ४॥ जनं तावकीनं किमेनं सुदीनं वृथाजातमेवं वृथोपेक्षसे त्वम् । रमेशैवमेवं वृथोपेक्षसे चेत् क्षमायाः प्रकाशो मदन्येन केन ॥ ५॥ मदन्यः क्व विप्रेषु वैश्येषु- राजस्वथो शूद्रजातिष्वथो...
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द्वादशस्तोत्राणि

द्वादशस्तोत्राणि ॥ द्वादश स्तोत्राणि॥ अथ प्रथमस्तोत्रम् वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् । इन्दिरापतिमाद्यादि वरदेश वरप्रदम् ॥ १॥ नमामि निखिलाधीश किरीटाघृष्टपीठवत् । हृत्तमः शमनेऽर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥ २॥ जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः । स्वर्णमञ्जीरसंवीतं आरूढं जगदम्बया ॥ ३॥ उदरं चिन्त्यं ईशस्य तनुत्वेऽपि अखिलम्भरम् । वलित्रयाङ्कितं नित्यं आरूढं श्रियैकया ॥ ४॥ स्मरणीयमुरो विष्णोः इन्दिरावासमुत्तमैः । var इन्दिरावासमीशितुः इन्दिरावासमुत्तमम् अनन्तं अन्तवदिव भुजयोरन्तरङ्गतम् ॥ ५॥ शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः । पीनवृत्ता जगद्रक्षा केवलोद्योगिनोऽनिशम् ॥ ६॥ सन्ततं चिन्तयेत्कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् । वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेऽनिशं यतः ॥ ७॥ स्मरेत यामिनीनाथ सहस्रामितकान्तिमत् । भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेः मुखपङ्कजम् ॥ ८॥ पूर्णानन्यसुखोद्भासिं अन्दस्मितमधीशितुः ।...
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श्रीकृष्णजयन्ती निर्णयः

श्रीकृष्णजयन्ती निर्णयः रोहिण्या मध्यरात्रे तु यदा कृष्णाष्टमी भवेत् । जयन्ती नाम सा प्रोक्ता सर्वपापप्रणाशनी(नं) ॥ १॥ यस्यां जातो हरिः साक्षान्नि शेते भगवानजः । तस्मात्तद्दिनमत्यर्थं पुण्यं पापहरं शुभपरम् ॥ २॥ तस्मात्सर्वैर्रुपोश्या सा जयन्ती नाम सा(वै) सदा । द्विजातिभिर्विशेषेण तद्भक्तैश्च विशेषतः ॥ ३॥ यो भुङ्क्ते तद्दिने मोहा(लोभा)त् पूयशोणितमत्ति सः । तस्मादुपवासेन्नित्य(पुण्य)ं तद्दिने(नं) श्रद्धयान्वितः ॥ ४॥ कृत्वा शौचं यथा न्यायं स्नानं कुर्यादतंद्रितः । प्रभात काले कुर्वीत यूगायेत्यादिमन्त्रतः ॥ ५॥ नित्याह्निकं प्रकुर्वीत भगवन्तमनुस्मरन् । मध्याह्न काले च पुमान् सायङ्काले त्वतन्द्रितः ॥ ६॥ स्नायेत पूर्वमन्त्रेण वासुदेवमनुस्मरन् । ततः पूजां प्रकुर्वेत विधिवत्सुसमाहितः ॥ ७॥ यनायेति च...
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