2026 Astrologyविवाह मुहूर्त

नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह किन जातकों के विवाह में बनेंगे बाधक?

40views

भारतीय वैदिक ज्योतिष में विवाह को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का बंधन नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और कर्मों का संगम है। कुंडली में यदि ग्रह अनुकूल हों तो विवाह समय पर, सुखद और स्थिर होता है, लेकिन यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो तो विवाह में देरी, बाधा, टूटे रिश्ते, बार-बार बात बिगड़ना या विवाह के बाद तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

विवाह के प्रमुख कारक ग्रहों में गुरु (बृहस्पति) का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। गुरु को विवाह, ज्ञान, धर्म, संस्कार, आशीर्वाद और शुभता का ग्रह कहा गया है। विशेष रूप से स्त्री कुंडली में गुरु और पुरुष कुंडली में शुक्र विवाह के मुख्य कारक माने जाते हैं।

नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह की चाल कई राशियों और जातकों के विवाह जीवन को प्रभावित करने वाली है। कुछ जातकों के लिए गुरु विवाह के मार्ग को प्रशस्त करेंगे, तो वहीं कुछ लोगों के लिए गुरु ग्रह ही विवाह में सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं।

वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व

गुरु ग्रह को देवगुरु बृहस्पति कहा जाता है। यह ग्रह—

  • विवाह में शुभता
  • जीवनसाथी का चरित्र
  • दांपत्य सुख
  • संतान सुख
  • सामाजिक स्वीकृति
  • परिवार का आशीर्वाद

इन सभी का प्रतिनिधित्व करता है।

यदि कुंडली में गुरु बलवान हो तो—

  • विवाह समय पर होता है
  • योग्य जीवनसाथी मिलता है
  • विवाह के बाद जीवन स्थिर रहता है

लेकिन यदि गुरु—

  • अशुभ राशि में हो
  • नीच का हो
  • पाप ग्रहों से पीड़ित हो
  • छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो

तो विवाह में देरी और बाधाएँ निश्चित मानी जाती हैं।

ALSO READ  वर्ष 2026 में किन राशि के जातकों पर रहेगी साढ़ेसाती?

2026 में गुरु ग्रह की स्थिति और गोचर

नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह की चाल अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

2026 में गुरु का गोचर

  • वर्ष के अधिकांश भाग में गुरु मिथुन राशि में गोचर करेंगे
  • मध्य वर्ष में गुरु की वक्री अवस्था कई जातकों के विवाह योग को रोक सकती है
  • गुरु का राहु और शनि से दृष्टि संबंध भी बनेगा

इन्हीं कारणों से 2026 में कुछ राशियों और कुंडलियों के लिए गुरु विवाह में बाधक बन सकते हैं।

2026 में गुरु किन जातकों के विवाह में बाधा बनेंगे?

1. मिथुन राशि के जातक

2026 में गुरु स्वयं मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। यह स्थिति सभी मिथुन जातकों के लिए शुभ नहीं कही जा सकती।

विवाह में बाधा के कारण:

  • गुरु का सातवें भाव पर कमजोर प्रभाव
  • निर्णय लेने में भ्रम
  • रिश्तों को लेकर असमंजस
  • बार-बार विवाह की बात बनकर टूटना

विशेष रूप से जिन जातकों की कुंडली में—

  • गुरु पहले से कमजोर है
  • सप्तम भाव पर शनि या राहु की दृष्टि है

उनके लिए 2026 विवाह में विलंब का वर्ष बन सकता है।

2. कन्या राशि के जातक

कन्या राशि वालों के लिए गुरु का गोचर दशम भाव से होगा, जो विवाह के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

समस्याएँ:

  • करियर प्राथमिकता बन जाना
  • परिवार की अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाना
  • रिश्तों में व्यावहारिकता की अधिकता

कन्या राशि की महिलाओं के लिए गुरु की यह स्थिति विशेष रूप से विवाह में देरी का संकेत देती है।

3. धनु राशि के जातक

धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु हैं, लेकिन 2026 में गुरु धनु राशि से सप्तम भाव में रहेंगे।

ALSO READ  मकर संक्रांति 2026 से मौनी अमावस्या तक? जानिए कब कौन-सा महापर्व पड़ेगा..

बाधा के कारण:

  • अपेक्षाओं का अत्यधिक होना
  • जीवनसाथी को लेकर कठोर मानदंड
  • अहंकार और वैचारिक टकराव

जिन धनु जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर है, उनके लिए 2026 विवाह प्रस्तावों में असफलता ला सकता है।

4. मीन राशि के जातक

मीन राशि भी गुरु की ही राशि है, लेकिन 2026 में गुरु का चौथे भाव से गोचर विवाह के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

विवाह में बाधाएँ:

  • पारिवारिक असहमति
  • गृह क्लेश
  • माता-पिता की स्वीकृति न मिलना

विशेषकर मीन राशि की लड़कियों के लिए विवाह में देरी के योग प्रबल रहेंगे।

5. वे जातक जिनकी कुंडली में गुरु पहले से पीड़ित है

राशि से अधिक महत्वपूर्ण होती है जन्म कुंडली। 2026 में वे जातक विशेष रूप से प्रभावित होंगे जिनकी कुंडली में—

  • गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो
  • गुरु राहु या केतु से युत हो (गुरु चांडाल योग)
  • गुरु नीच राशि (मकर) में स्थित हो
  • गुरु अस्त अवस्था में हो

ऐसे जातकों के लिए 2026 में विवाह में गंभीर बाधाएँ आ सकती हैं।

गुरु चांडाल योग और विवाह बाधा 

यदि किसी जातक की कुंडली में गुरु और राहु की युति है तो इसे गुरु चांडाल योग कहा जाता है।

2026 में गुरु के गोचर के कारण यह योग सक्रिय हो सकता है, जिससे—

  • रिश्तों में धोखा
  • गलत जीवनसाथी का चयन
  • समाज में बदनामी का डर
  • विवाह टूटने की संभावना

बढ़ सकती है।

वक्री गुरु और विवाह में देरी

2026 में गुरु का वक्री होना विवाह के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगा।

ALSO READ  मूलांक 1 वालों के लिए कैसा रहेगा साल 2026?

वक्री गुरु के प्रभाव:

  • विवाह की तारीख बार-बार टलना
  • परिवार की सहमति में देरी
  • पुराने रिश्तों का दोबारा लौट आना
  • निर्णय लेने में असमर्थता

स्त्री कुंडली में गुरु और विवाह बाधा

जिन महिलाओं की कुंडली में—

  • गुरु कमजोर है
  • सप्तम भाव पीड़ित है
  • गुरु पर शनि की दृष्टि है

उनके लिए 2026 में विवाह में विशेष सावधानी की आवश्यकता होगी।

2026 में गुरु बाधा से मुक्ति के ज्योतिषीय उपाय

यदि 2026 में गुरु आपके विवाह में बाधा बन रहे हैं तो निम्न उपाय अत्यंत प्रभावी माने गए हैं—

1. गुरु बीज मंत्र का जाप

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
प्रतिदिन 108 बार जाप करें।

2. गुरुवार का व्रत

  • पीले वस्त्र धारण करें
  • पीली दाल, हल्दी, केला दान करें

3. पीपल वृक्ष की पूजा

  • गुरुवार को पीपल के नीचे दीपक जलाएँ
  • गुरु ग्रह को बल मिलता है

4. विवाह में देरी हेतु विशेष उपाय

  • गुरुवार को गाय को चना-गुड़ खिलाएँ
  • ब्राह्मण को पीला वस्त्र दान करें

5. कुंडली दोष निवारण

  • गुरु चांडाल दोष शांति
  • नवग्रह शांति पूजा
  • बृहस्पति शांति हवन
निष्कर्ष
नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह कई जातकों के लिए विवाह में बाधा बन सकते हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित है। मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
हालाँकि, ज्योतिष में कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। सही समय पर किए गए उपाय, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण से गुरु की कृपा पुनः प्राप्त की जा सकती है और विवाह के मार्ग खुल सकते हैं।