कर्म का भोग ही है जन्म - कर्म का भोग ही है जन्म - ‘‘कथम उत्पद्यते मातुः जठरे नरकागता गर्भाधि दुखं यथा भुंक्ते तन्मे कथय केषव’’ गरूड पुराण में उक्त पंक्तियाॅ लिखी हैं, जिससे साबित होता है कि गर्भस्थ षिषु के ऊपर भी ग्रहों का प्रभाव शुरू हो जाता है......
कालसर्प दोष का ज्योतिषीय यर्थाथ –
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