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Category: Vastu

गृह मंदिर में पूजा का विधान …….

गृह मंदिर में पूजा का विधान ……. * देवालय मंदिर या गुंबद के आकार का न बनाकर ऊपर से चपटा बनवाएँ। * देवालय जहाँ तक हो सके ईशान कोण में रखें। यदि ईशान न मिले तो पूर्व या पश्चिम में स्थापित करें। * देवालय में कुल देवता, देवी, अन्नपूर्णा, गणपति,…

ऑफिस में रखें इन बातो का ध्यान

1. दरवाजे की ओर पीठ करके कभी न बैंठें। 2. बीम के नीचे न तो कभी बैठें और न ही काम करें। 3. अपने केबिन के दक्षिण-पश्चिम कोने में बैठे और मुख उत्तर अथवा पूर्व दिशा में रहें। 4. अपने कक्ष/केबिन का दक्षिण-पश्चिम कोना कभी भी रिक्त न रहने दें।…

वास्तु शास्त्र में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ ??????

वास्तु’ का सहज शाब्दिक अर्थ एक ऐसे आवास से है जहां के रहवासी सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध हों। इसीलिए वास्तु विज्ञान में हमारे पूर्वजों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे अनेक तथ्यों को शामिल किया है जो कि किसी भी भवन के रहवासियों को शांतिपूर्वक रहने में परम सहायक होते…

वास्तु में भवन वेध

भवन वेधः मकान से ऊँची चारदीवारी होना भवन वेध कहलाता है। जेलों के अतिरिक्त यह अक्सर नहीं होता है। यह आर्थिक विकास में बाधक है। दो मकानों का संयुक्त प्रवेश द्वार नहीं होना चाहिए। वह एक मकान के लिए अमंगलकारी बन जाता है। मुख्यद्वार के सामने कोई पुराना खंडहर आदि…

किस प्रकार दूर कर सकते हैं उत्तर पश्चिम के दोषों को

वायव्य कोण परवायु देव का पूर्ण अधिकार है | इस स्थान का सीधा सम्बन्ध घर में भूतल पर वायु व जल से प्रभाव से है | इसलिए घर में जल भण्डारण हेतु सभी टंकियां इस स्थान पर रखने का निर्देश प्राप्त होता है | उसके आलावा यह स्थान मेहमानों का…

वास्तु में फव्वारा

आपने बड़े भवन, होटल, कमर्शियल कॉम्पलेक्स आदि में अक्सर फाउंटेन लगे देखे होंगे। दरअसल जल संबंधी दोष दूर करने के लिए जलाशय या फव्वारा लगाया जाता है। जल जीवन का प्रतीक है इसलिए यह शुभ होता है, लेकिन यदि जल स्थान और घर का ढलान गलत दिशा में बना है…

निःसंतान दम्पति अपनाये ये वास्तु नियम

संसार के हर स्त्री-पुरुष की विवाह के बाद पहली कामना संतान प्राप्त करने की रहती है परन्तु कई बार देखने में यह आता है कि पति-पत्नी शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्ण स्वस्थ्य रहने के बाद भी निःसंतान ही रह जाते हैं। किसी भी दंपत्ति के निःसंतान रहने में भाग्य…

दिशाओ से सम्बंधित कुछ प्रमुख वास्तु सिद्धांत ……….

जिस प्रकार ग्रहों का घूमना, मौसम का बदलना इत्यादि प्रकृति के नियम हैं। इसी प्रकार वास्तु सिद्वान्त भी प्राकृतिक नियम हैं। भूमि/भवन के नार्थ–ईस्ट भाग का सम्बन्ध धन, पूरे परिवार की सुख–शान्ति, पहली/चौथी/ आठवीं संतान और घर के कमाने वाले सदस्य से होता है। साउथ–ईस्ट भाग का सम्बन्ध सुख–शान्ति, प्रशासनिक…

तांबे की तार या रत्न गाड़ने से वास्तुदोष दूर हो जाते है??????????

तांबे की तार या रत्न गाड़ने से वास्तुदोष दूर हो जाते है?????????? बिलकुल नहीं! पिछले कुछ वर्षों से कुछ वास्तुविद् प्लाट के दोषपूर्ण बढ़ाव से उत्पन्न होने वाले कुप्रभाव को समाप्त करने के लिए जमीन में तांबे की तार गड़वाते है तो कुछ प्लाट की ऊर्जा बढ़ाने के लिए चारों…

क्या श्रीयंत्र के द्वारा वास्तुदोषों से राहत पाई जा सकती है?????????

क्या श्रीयंत्र के द्वारा वास्तुदोषों से राहत पाई जा सकती है? बिलकुल नहीं! श्रीयंत्र चाहे सिद्ध किया हो या सिद्ध न किया हो, तो भी धार्मिक आस्था में उसका एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह श्रीयंत्र स्फटिक के हो या अन्य धातु का, पर वास्तुशास्त्र के अनुसार वास्तु दोष निवारण में…

वास्तु अनुसार कैसे बनाएँ अपना रसोई घर

हमारे घर में किचन किस दिशा में स्थित है, वह कौन सा कोण बना रहा है और वह वास्तु के अनुरूप है कि नहीं। क्या कारण है कि घर में सबकुछ है पर शांति नहीं, संतोष नहीं। वैसे आप को बता दें कि घर की खुशहाली किचन से ही होकर…

घर में बगीचे वास्तु की नज़र से

वास्तु ऐसा माध्यम है जिससे आप जान सकते हैं कि किस प्रकार आप अपने घर को सुखी व समृद्धशाली बना सकते हैं। नीचे वास्तु सम्मत ऐसी ही जानकारी दी गई है जो आपके लिए उपयोगी होगी- 1- ऐसे मकान जिनके सामने एक बगीचा हो, भले ही वह छोटा हो, अच्छे…

पेड़ पौधों से कैसे करें गृह शांति

पेड़-पौधों पेड़-पौधों जीवन के विभिन्न भागों पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, यह प्रभाव सकारात्मक भी होता है और नकारात्मक भी। नकारात्मक प्रभाव को रोकने या कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके अपनाए जाते हैं, कहीं मंत्र जाप की सलाह दी जाती है, कहीं रत्न धारण करने की…

नया मकान बनाने से पहले ध्यान रखें कुछ खास बातें

नए भवन के निर्माण कराते समय आप अपने शहर के किसी अच्छे वास्तु के जानकार से सलाह अवश्य लें। वास्तु का प्रभाव भवन के रहने वाले व्यक्तियों पर अवश्य पढ़ता है। परंतु इसके साथ-साथ व्यक्ति विशेष के ग्रह योग भी वास्तु के प्रभाव को घटाते-बढ़ाते हैं। हो सकता है कि…

The Introduction and Necessity of Vastu Shastra

Vaastu -Shastra is a Vast and ancient science of living. The word Vaastu is derived from the root .Vas. which means .to reside.. Dr. Havell have suggested that Vastu Shastra developed between 6000 BCE and 3000 BCE. It is not an equivalent of the word architecture. Vaastu is architecture and…

अपने भवन या घर में वास्तु दोष कैसे पहचाने

भवन निर्माण एवं वास्तु विज्ञान दो अलग अलग विषय हैं। एक व्यक्ति अपने मनोनुकूल गृह का निमार्ण तो करवा सकता है अपने आर्किटेक्ट या डिज़ाइनर से कहकर उसे अच्छी प्रकार से सजा भी सकता है परन्तु वह उसमें रहने पर सुखी जीवन व्यतीत करेगा यह आवश्यक नहीं। एक आर्किटेक्ट भी…

इशान कोण और कर्ज वास्तु का अर्थ हमारी भाषा में सिर्फ इतना ही है की वास्तव में ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में हो; क्योंकि पंच तत्वों में निर्मित शरीर को यतिपिंडे तत्व्ब्रह्मंडे के सिधांत के अनुसार देखें तो जो कुछ इस ब्रह्माण्ड में है, वह इस शरीर में मौजूद…