ये हैं मां दुर्गा के 10 प्रसिद्ध मंदिर, शक्तिपीठ के दर्शन से होती है मनोकामनाएं पूरी

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नवरात्रि पर अगर आपने मां के दर्शन का प्लान बनाया है तो आपको कुछ जगह दर्शन को जरूर जाना चाहिए। यहां मां सती के कई स्वरूप शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं।

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1. अम्बाजी मंदिर, गुजरात
गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित अम्बा जी के मंदिर नवरात्रि में दर्शन को जरूर जाएं।ये मंदिर लगभग बारह सौ साल पुराना है। मां अम्बा-भवानी के शक्तिपीठों में से ये मंदिर एक है। मंदिर के गर्भगृह में मां की प्रतिमा नहीं है बल्कि श्री-यंत्र स्थापित है। इस श्री-यंत्र देख कर लगता है कि मां की प्रतिमा ही यहां विराजित है।

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 श्रीसंगी कलिका मंदिर, कर्नाटक
श्रीसंगी कलिका मंदिर काली मां को समर्पित है और यह कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। यह कर्नाटक का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां पर मां दुर्गा के काली रूप की पूजा करने का खास विधान है।

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नैना देवी मंदिर, नैनीताल
नैनीताल के नैनी झील के उत्त्तरी किनारे पर स्थित नैना देवी मंदिरमाता सती के शक्ति रूप की पूजा होती है। मंदिर में दो नेत्र हैं, जो नैना देवी को दर्शाते हैं।

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श्री महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर
श्री महालक्ष्मी मंदिर विभिन्न शक्ति पीठों में से एक है और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। यहां भक्त की मनोकामना जरूर पूरी होती है। भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाते इस मंदिर का नाम माता महालक्ष्मी पड़ा।

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करणी माता मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर मां करणी देवी का विख्यात मंदिर है। इस मंदिर को लोग चूहे वाले मंदिर के नाम से भी बुलाते हैं। यहां आना कई तीर्थ का पुण्य देता है।

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कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी (असम)
नीलांचल पर्वत पर माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सबसे सर्वोत्तम माना गया है। यहां पर माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा था। उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई थी। यहां देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं।

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ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा है ज्वाला देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। शक्तिपीठ वह स्थान कहलाता है जहां-जहां भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे। शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी।

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दुर्गा मंदिर, वाराणसी
एक बंगाली महारानी ने 18 वीं सदी में दुर्गा मंदिर का बनवाया था। यह मंदिर, भारतीय वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली की नागारा शैली में बना है। वर्गाकार आकृति के तालाब के किनारे बना इस मंदिर में देवी स्वयं प्रकट हुई थीं। यहां मूर्ति की स्थापना नहीं की गई है।

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दंतेश्वरी मंदिर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित है दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर. हसीन वादियों के लिए मशहूर यह मंदिर काफी पुराना है. ऐसी मान्यता है कि यहां सती का दांत गिरा था, जिसके कारण जगह का नाम दंतेश्वरी पड़ा.

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दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर 1855 में बना था और इस मंदिर के निर्माण के लिए खुद काली मां ने जान बाजार की महारानी रासमणि ने स्वप्न दिया था। यहां आने के बाद ही इस मंदिर की भव्यता और शक्ति का अहसास होता है।

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