Home Articles Astrology
Astrology

क्या आप जानते हैं कि विवाह मे कौन से ग्रह का असर सबसे ज्यादा होता है ?

क्या आप जानते हैं कि विवाह मे कौन से ग्रह का असर सबसे ज्यादा होता है ?

“सप्तम भाव को विवाह का भाव कहा जाता है, इस भाव से संबन्ध रखने वाले ग्रह वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते है,सप्तम भाव की राशि, इस भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति के जीवनसाथी के स्वभाव व आचरण को दर्शाते हैं”

विवाह भाव, विवाह भाव के स्वामी तथा विवाह के कारक ग्रह शुभ ग्रहों से संबन्ध बनाते हैं तो दाम्पत्य जीवन में सुख-शान्ति की वृद्धि होती है. इसके विपरीत जब इन तीनों पर अशुभ या पापी ग्रहों का प्रभाव होता है तो गृहस्थी में तनाव बढ़ता है. आईये देखे कि सप्तम भाव में होने वाली ग्रहों की युति किस प्रकार अपना प्रभाव डालती है.

श्री महाकाल धाम मे कुम्भ विवाह/अर्क विवाह पूजन बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करें 👈🏾

सप्तम भाव में मंगल- बुध कि युति 
अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में विवाह भाव में मंगल व बुध दोनों एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति के जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कमी के योग बनते है. इस योग के व्यक्ति के जीवनसाथी को बेवजह इधर-उधर भटकना पड़ सकता है. इनके साथी को वाद-विवाद कि स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए तथा अच्छे कार्य करना चाहिए.

सप्तम भाव में मंगल-गुरु की युति 
सप्तम भाव में जब मंगल व गुरु कि युति हो रही हों तो व्यक्ति के जीवनसाथी के साहस में वृद्धि की संभावनाएं बनती है. इस योग के फलस्वरुप व्यक्ति का जीवनसाथी पराक्रमी होता है. उसे अपने मित्रों व बंधुओं का सुख प्राप्त होता है. घूमने का शौकीन होता है. इस योग के व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से कुछ कम सहयोग मिल सकता है.

ALSO READ  AstroShrine ऐप अब Google Play Store पर उपलब्ध – अब अपने फ़ोन से जुड़िए प्रमाणित वैदिक ज्योतिषियों से

सप्तम भाव में मंगल-शुक्र की युति 
कुण्डली में सप्तम भाव में मंगल व शुक्र की युति व्यक्ति के जीवनसाथी को रोमांटिक बनाती है. इस योग के फलस्वरुप व्यक्ति का जीवनसाथी विशेष स्नेह करने वाला होता है. ऎसे व्यक्ति को अपने जीवनसाथी के कारण कई बार अपयश का भी सामना करना पड़ सकता है. कुण्डली में यह योग होने पर व्यक्ति को अपने जीवन साथी से संबन्धों में ईमानदार रहना चाहिए.

सप्तम भाव में मंगल-शनि की युति 
अगर कुण्डली के सप्तम भाव में मंगल व शनि दोनों एक साथ स्थित हों तो संतान सुख में कमी हो सकती है. इस योग में किसी कारण से जीवनसाथी से कुछ समय के लिए दूर रहना पड़ता है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कमी भी आती है. वैवाहिक जीवन में इन्हें अपयश से बचने का प्रयास करना चाहिए.

ALSO READ  🔱🚨 बड़ी खबर: श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में पूजा-अनुष्ठान हुए शुरू! अब घर बैठे बुक करें वैदिक पूजा — संकल्प से लेकर अनुष्ठान तक पूरी व्यवस्था एक ही मंच पर

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें