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Sawan 2019: 23 जुलाई को सावन का पहला मंगला गौरी व्रत | जाने व्रत एवं पूजा विधि

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Sawan 2019: श्रावण मास में जिस तरह से सोमवार व्रत का महत्व है, वैसे ही मंगला गौरी व्रत का भी खास महत्व है। सावन मास के मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत होता है, इस दिन शिव प्रिया माता पार्वती का षोडशोपचार पूजन होता है। सावन मास का पहला मंगला गौरी व्रत 23 जुलाई को है। इस दिन माता मंगला गौरी की पूजा करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

माता मंगला गौरी की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पति को लंबी उम्र मिलती है और संतान को सुखी जीवन का फल मिलता है। जिन लोगों के दाम्पत्य जीवन में कोई समस्या आ रही है, उनको सोमवार व्रत के साथ ही मंगला गौरी व्रत भी करना चाहिए।

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मंगला गौरी व्रत की तिथियां

इस बार सावन में चार सोमवार के साथ चार मंगलवार भी पड़ रहे हैं, इसलिए इस बार सावन में चार मंगला गौरी व्रत हैं। चार सोमवार और चार मंगलवार होना शुभ माना जाता है। इस बार 30 जुलाई को सावन की शिवरात्रि भी पड़ रही है।

23 जुलाई: सावन का पहला मंगलवार।

30 जुलाई: सावन का दूसरा मंगलवार।

06 अगस्त: सावन का तीसरा मंगलवार।

13 अगस्त: सावन का चौथा मंगलवार।

मंगला गौरी व्रत एवं पूजा विधि

व्रत वाले दिन महिलाओं को सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होना चाहिए। इसके उपरान्त स्नान कर साफ वस्त्र पहनना चाहिए। पूजा घर में माता मंगला गौरी यानी पार्वती जी की तस्वीर को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करना चाहिए। फिर व्रत का संकल्प करते हुए आटे का दीप प्रज्वलित करें और माता का षोडशोपचार पूजन करें। षोडशोपचार पूजन में माता को सुहाग की सामग्री 16 की संख्या में चढ़ाएं। फल, फूल, माला, मिठाई आदी भी 16 की संख्या में होनी चाहिए।

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मंगला गौरी व्रत कथा  

कथा के अनुसार एक गांव में बहुत धनी व्यापारी रहता था कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उसका कोई पुत्र नहीं हुआ। कई मन्नतों के पश्चात बड़े भाग्य से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। परंतु उस बच्चे को श्राप था कि 16 वर्ष की आयु में सर्प काटने के कारण उसी मृत्यु हो जाएगी।

संयोगवश व्यापारी के पुत्र का विवाह सोलह वर्ष से पूर्व मंगला गौरी का व्रत रखने वाली स्त्री की पुत्री से हुआ। व्रत के फल स्वरूप उसकी पुत्री के जीवन में कभी वैधव्य दुख नहीं आ सकता था। इस प्रकार व्यापारी के पुत्र से अकाल मृत्यु का साया हट गया तथा उसे दीर्घायु प्राप्त हुई।