इंदौर में विजय नगर से कुछ दूर खजराना चौक के पास ही एक मंदिर है खजराना मंदिर। ये मंदिर गणपति जी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। बताया जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण अहिल्या बाई होल्कर ने कराया था और इस मंदिर में गणपति जी केवल सिंदूर से स्थापित किए गए हैं। यह मंदिर मुख्यत: गणपति जी का ही है।
इस मंदिर की मान्यता है कि यहां जब भी कोई दिल से मनोकामना की जाती है वह पूरी जरूरी होती है, लेकिन इसे पूरी करने के लिए कुछ अलग तरीके से प्रयास करना होता है। ये पहला मंदिर हैं जहां मनोकामना पूरी करने के लिए लोग हिंदू शास्त्र के विपरीत काम करते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तब मंदिर में आ कर अपनी इस गलती का सुधार करते हैं। तो आइए जानते हैं इस मंदिर की क्या मान्यता है और मनोकामना पूर्ण करने के लिए लोग यहां क्या करते हैं।
गणपति के पीठ पर बनाते हैं उल्टा स्वास्तिक
खजराना मंदिर में जो भी भक्त अपनी मनोकामना ले कर आता है वह गणेश जी के पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाता है। जीं हां, उल्टा स्वास्तिक और जब उसकी मनोकामनागणपति जी पूर्ण कर देते हैं तो भक्त मंदिर में आकर भगवान के पीठ पर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस