घर में पोछा लगाते समय इन वास्तु टिप्स का रखें ध्यान नकारात्मक ऊर्जा होगी दूर घर में बनी रहेगी सुख-शांति?
कुंडली में कमजोर है चंद्रमा तो बढ़ सकती हैं परेशानियां? जानिए ज्योतिषाचार्य से चंद्र दोष के संकेत और उपाय…!
Other Articles श्री शिवाष्टक Junior EditorJune 13, 2025June 13, 202551 श्री शिवाष्टक आदि अनादि अनंत अखंड अभेद अखेद सुबेद बतावैं । अलग अगोचर रूप महेस कौ जोगि-जति-मुनि ध्यान न पावैं...
Other Articlesभूतनाथ अष्टकम्Junior EditorJune 13, 202545 शिव शिव शक्तिनाथं संहारं शं स्वरूपम् नव नव नित्यनृत्यं ताण्डवं तं तन्नादम् घन घन घूर्णिमेघं घंघोरं घंन्निनादम् भज भज...
Other Articlesलिङ्गाष्टकं स्तोत्रJunior EditorJune 13, 202581लिङ्गाष्टकं स्तोत्र: ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् । जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ 1 ॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् । रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्...
Other Articlesश्री शिव सहस्त्रनाम Junior EditorJune 13, 202547श्री शिव सहस्त्रनाम ॐ स्थिराय नमः। ॐ स्थाणवे नमः। ॐ प्रभवे नमः। ॐ भीमाय नमः। ॐ प्रवराय नमः । ॐ...
Other Articlesशिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्Junior EditorJune 13, 202551॥ शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनायभस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बरायतस्मै न काराय नमः शिवाय॥1॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चितायनन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजितायतस्मै म काराय नमः...
Other Articles श्रीशिवरक्षास्तोत्रम्Junior EditorJune 13, 2025June 13, 202540॥ श्रीशिवरक्षास्तोत्रम् ॥ ॥ विनियोग ॥ श्री गणेशाय नमः॥ अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः॥ श्री सदाशिवो देवता॥ अनुष्टुप् छन्दः॥ श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे...
Other Articlesशिव ताण्डव स्तोत्रम्Junior EditorJune 13, 202555जटा-अटवी-गलत्-जल-प्रवाह-पावित-स्थले गले-अवलम्ब्य लम्बितां भुजंग-तुङ्ग-मालिकाम् डमड्-डमड्-डमड्-डमत्-निनाद-वड्डमर्वयं चकार चण्ड-ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥1॥ जटा-कटाह-सम्भ्रम-भ्रमत्-निलिम्प-निर्झरी विलोल-वीचि-वल्लरी-विराजमान-मूर्धनि धगत्-धगत्-धगज्ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिः प्रति-क्षणं मम ॥२...
Other Articlesश्रीअमलेश्वर वीर-स्तवःJunior EditorJune 12, 2025June 12, 202540 श्रीअमलेश्वर वीर-स्तवः कालातिगं कलुषप्रशमन्यनाथं, निर्मायिकं वपुर्निखिलं स्वदीपम्। अम्लानशुद्धमनसं परमेशमीडे, खारूनतीरनिलयं शरणं प्रपद्ये॥ भीमार्जुनाद्ययुधवीरवरानुकूलं, द्रौपद्यनन्दनसुतार्तिहरं दयालुम्। युद्धेऽपि शान्तिधृतमूर्तिममुं नितान्तं, अमलेश्वरं प्रणामि वीरमुखं पुराणम्॥ मौर्यवंशविभवः क्षत्रराजशेखरः सन्, अशोकनाम जगति शान्तिपथं विधाय। शमशूलहरमार्गमधिगत्य भूयः, अमलेशपूजनरतः बभूव धीमान्॥ विक्रमादित्यसम्राज्यशिरोमणिस्तु, उज्जयिन्यां निवसन् शिवतत्त्वबोधी। स्वप्नसंकेतवशात् खारुने गतः सन्, मौनव्रतेन समुपास्य हरं ददर्श॥ शङ्कराचार्यमहायशसे कदाचित्, दक्षिणदेशविहारवशात् समागात्। खारूतटे स शिवमेकमवेक्ष्य भूयो, "निर्मलशक्तिप्रभवोऽयममल" इत्यवोचत्॥ त्वं कालजेताऽखिलशक्तिसारः, त्वं निर्मलः शिवमहाशिवार्थः। त्वं भक्तवश्यः खलदर्पहन्ता, त्वं खारुनाथोऽमलनाथदेवः॥ मां पाहि नाथ! भवदोषशान्त्यै, ममापदां त्वरितसङ्गहाय। त्वद्भक्तिरस्तु दृढमूलनीता, त्वमेव मे जीवितकारणं च॥ पाण्डवोऽशोकविक्रमशङ्करश्च, ये ये गता हरिपदं समवेक्ष्य भक्त्याः। तेषां वशोऽसि शरणागतवत्सले त्वं,...