कनकधारा स्तोत्रम् — आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह महालक्ष्मी स्तुति स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली और फलदायी है। यदि विधिपूर्वक इसका पुरश्चरण किया जाए, तो यह दारिद्र्य नाश, वैभव प्राप्ति, ऋद्धि-सिद्धि, और लक्ष्मी कृपा के लिए अचूक माना गया है। 🌟 कनकधारा स्तोत्रम् पुरश्चरण — संपूर्ण साधना विधि 🪔 1. स्तोत्र परिचय: रचना: आदि शंकराचार्य श्लोक संख्या: 21 श्लोक + 1 फलश्रुति स्रोत: महालक्ष्मी की स्तुति हेतु रचित नाम "कनकधारा" का अर्थ: "सोने की धारा" (स्वर्ण वर्षा की कृपा) 🎯 2. पुरश्चरण का उद्देश्य (सिद्धि): उद्देश्य फल दरिद्रता निवारण आर्थिक संकटों का...
"आदित्यहृदय स्तोत्र" — यह स्वयं श्रीराम को महर्षि अगस्त्य द्वारा दिए गए एक रहस्यमय स्तोत्र का रूप है, जो सूर्य के साक्षात् ब्रह्मरूप का स्तवन है। इसका पुरश्चरण करने से न केवल मानसिक बल, आत्मिक तेज और आयु बढ़ती है, बल्कि शत्रु, रोग, भय, अकाल मृत्यु और दुर्भाग्य का नाश होता है। 🔆 आदित्यहृदय स्तोत्र पुरश्चरण — सम्पूर्ण साधना विधि 🪔 1. मंत्र / स्तोत्र पाठ आदित्यहृदय स्तोत्रम् – कुल श्लोक: 31आरंभ — "ततो युद्धपरिश्रान्तं..."अंत — "जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः॥" 👉 यह पूरे रूप में ही एक मंत्रात्मक स्तोत्र...
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ स्वाहा" यह मंत्र भगवान बटुक भैरव का अत्यंत प्रभावशाली आपदुद्धारण (आपत्ति नाशक) मंत्र है। यह मंत्र विशेष रूप से संकट, भय, बाधा, दुष्ट शक्तियों, अकारण मुकदमे, शत्रु बाधा, और भूत-प्रेत दोष से रक्षा हेतु जपा जाता है। 🌒 मंत्र का संक्षिप्त अर्थ: ॐ ह्रीं बं — बीज मंत्र हैं जो चेतना को जाग्रत करते हैं और शक्ति का आह्वान करते हैं। बटुकाय — बाल रूप वाले भैरव को नमन। आपदुद्धारणाय — आपदाओं (संकटों) से उबारने वाले। कुरु कुरु —...