नागों की कृपा, बाधाओं के निवारण, कालसर्प दोष की शांति, सुरक्षा एवं रहस्यमय प्रगति के लिए
7 ॥ नाग स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (नागों की कृपा, बाधा निवारण, कालसर्प दोष शांति, रक्षा व रहस्यमय उन्नति हेतु) 🔱 1. पुरश्चरण क्या है? "पुरश्चरण" का अर्थ होता है — मंत्र/स्तोत्र की पूर्व साधना, जिसमें विशेष संख्या में पाठ, जप, हवन, तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन आदि करके उस स्तोत्र/मंत्र की पूर्ण शक्ति प्राप्त की जाती है। यह साधना विशेष उद्देश्य, भक्ति या सिद्धि हेतु की जाती है। 🐍 2. नाग स्तोत्र पुरश्चरण कब करें? उत्तम समय: श्रावण मास (विशेषकर नाग पंचमी पर आरंभ करें) शुक्ल पक्ष में किसी...