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नागों की कृपा, बाधाओं के निवारण, कालसर्प दोष की शांति, सुरक्षा एवं रहस्यमय प्रगति के लिए

7 ॥ नाग स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (नागों की कृपा, बाधा निवारण, कालसर्प दोष शांति, रक्षा व रहस्यमय उन्नति हेतु) 🔱 1. पुरश्चरण क्या है? "पुरश्चरण" का अर्थ होता है — मंत्र/स्तोत्र की पूर्व साधना, जिसमें विशेष संख्या में पाठ, जप, हवन, तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन आदि करके उस स्तोत्र/मंत्र की पूर्ण शक्ति प्राप्त की जाती है। यह साधना विशेष उद्देश्य, भक्ति या सिद्धि हेतु की जाती है। 🐍 2. नाग स्तोत्र पुरश्चरण कब करें? उत्तम समय: श्रावण मास (विशेषकर नाग पंचमी पर आरंभ करें) शुक्ल पक्ष में किसी...
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धन, सौभाग्य, दरिद्रता का नाश, धन वृद्धि एवं लक्ष्मी की दिव्य कृपा हेतु विशेष तांत्रिक उपाय

॥ श्रीलक्ष्मीस्तोत्रम् (अगस्त्य ऋषि कृत) – पुरश्चरण विधि सहित संपूर्ण साधना विवरण ॥ (संपत्ति, सौभाग्य, दरिद्र्य नाश, श्री वृद्धि और दिव्य लक्ष्मी-कृपा हेतु विशिष्ट तांत्रिक स्तोत्र) 🔱 १. पुरश्चरण क्यों करें? अगस्त्य ऋषि कृत श्रीलक्ष्मीस्तोत्रम् देवी लक्ष्मी की एक तांत्रिक और अत्यंत प्रभावकारी स्तुति है। यह स्तोत्र विशेष रूप से सकल दरिद्रता नाश, स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति, वास्तविक वैभव (धन+धर्म) और शुभ ग्रह स्थिति हेतु साधक को अद्भुत फल देता है। ✨ लाभ: उद्देश्य फल दारिद्र्य नाश धन, अनाज, साधन की प्राप्ति गृह क्लेश से मुक्ति पारिवारिक सुख, सौम्यता व्यापार/व्यवसाय में...
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भय-शत्रु-विनाश, अचूक रक्षात्मक और तेजस्वी हनुमत् स्तोत्र

॥ श्री लाङ्गूलास्त्र-शत्रुंजय-हनुमत्स्तोत्रम् पुरश्चरण विधि ॥ (भय-शत्रु-विनाश, अचूक रक्षात्मक और तेजस्वी हनुमत् स्तोत्र) 🔱 १. पुरश्चरण क्यों करें? "श्री लाङ्गूलास्त्र शत्रुंजय हनुमान स्तोत्र" एक अत्यंत प्रभावकारी, तांत्रिक-आधारित हनुमान स्तोत्र है जो विशेषतः निम्न उद्देश्यों से जपा जाता है: उद्देश्य प्राप्त फल शत्रु-नाश गुप्त, प्रकट, मानसिक, दैविक शत्रु नाश अदृश्य रक्षात्मक कवच बुरी दृष्टि, जादू-टोना, ग्रहबाधा से सुरक्षा यात्रा व युद्ध सुरक्षा सैनिक, पुलिस, वकील, राजनेता, साधक हेतु तेज, साहस और अपराजेयता कार्य सिद्धि और निर्भयता भय, भूत, बाधा निवारण मृत्यु तुल्य कष्टों से बचाव यह स्तोत्र हनुमानजी के "लाङ्गूलास्त्र" (पूंछ...
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शक्ति, बुद्धि और दुखों के नाश के लिए एक अद्भुत उपाय

  ॥ श्री मारुतिस्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (हनुमत् भक्ति, बल, बुद्धि और कष्ट-विनाश की महान स्तुति) 🔱 1. पुरश्चरण क्यों करें? श्री मारुतिस्तोत्रम् हनुमानजी का अत्यंत प्रभावकारी स्तोत्र है। इसका शास्त्रोक्त पुरश्चरण निम्न लक्ष्यों हेतु किया जाता है: उद्देश्य लाभ मानसिक और शारीरिक बल आत्मबल, साहस, धैर्य की वृद्धि रोग निवारण विशेषतः वात रोग, मानसिक विकार शत्रु-विनाश अदृश्य बाधा, भय, भयभ्रम का शमन आकस्मिक दुर्घटनाओं से रक्षा यात्रा, व्यवसाय, सुरक्षा हेतु ब्रह्मचर्य और मनोनिग्रह संयम, तप, तेज और ओज की प्राप्ति 📘 2. श्री मारुतिस्तोत्रम् परिचय यह स्तोत्र "मनोजवं...
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पाप, ग्रहबाधा, पितृदोष शमन का अचूक उपाय

॥ श्री शिवमहिम्नस्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (प्राचीन परम शिवभक्त गंधर्व पुष्पदन्तकृत स्तोत्र) 🔱 १. पुरश्चरण क्यों करें? शिवमहिम्नस्तोत्रम् का जाप केवल स्तवन नहीं, भक्ति, ब्रह्मज्ञान और शिवतत्त्व की सिद्धि का महान साधन है। पुरश्चरण से: उद्देश्य फल आत्मिक शुद्धि चित्त, मन, वाणी की पवित्रता शिव कृपा आयु, आरोग्य, आय, ऐश्वर्य समस्त दोष शांति पाप, ग्रहबाधा, पितृदोष शमन मोक्षमार्ग में प्रवेश शिवतत्त्व का बोध पारिवारिक कल्याण सुख-शांति और संतान सौभाग्य 🔢 २. पुरश्चरण संख्या शिवमहिम्नस्तोत्र में ४३ श्लोक हैं। पाठ की संख्या निम्नानुसार हो सकती है: साधना स्तर पाठ संख्या...
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रोग-शत्रु नाश ,भय, बाधा, तंत्र से रक्षा अमोघ उपाय

॥ श्री महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ ("अयि गिरिनन्दिनी नन्दितमेदिनी" – यह स्तोत्र देवी दुर्गा की शक्ति, करुणा और महाविनाशिनी रूप की स्तुति है।) 🔱 1. पुरश्चरण क्यों करें? महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् – आदिशंकराचार्यकृत यह स्तोत्र केवल स्तवन नहीं, बल्कि देवी की पूर्ण तांत्रिक, आध्यात्मिक, भौतिक और मानसिक शक्ति का संचयन है। पुरश्चरण इसका विस्तारपूर्ण, नियमानुसार साधना रूप है: उद्देश्य फल शक्ति साधना आत्मबल, तेज, आकर्षण रोग-शत्रु नाश भय, बाधा, तंत्र से रक्षा दरिद्रता नाश दैविक कृपा, सौभाग्य मंत्र सिद्धि मन्त्र साधनाओं की पूर्ति भक्ति, वैराग्य, मोक्षमार्ग आत्मिक शांति और...
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तंत्र बाधा, भय, नज़र दोष से रक्षा,वशीकरण, शत्रु नाश,अघोरी प्रबलता

॥ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् पुरश्चरण विधि ॥ — यह श्रीचामुण्डायै-काली त्रिपुरभैरवी स्वरूपिणी देवी की अत्यंत गोपनीय, तांत्रिक और शक्तिशाली स्तुति है। यह स्तोत्र स्वयं देवी ने श्रीशिव से कहा है और इसे "सर्वतंत्र-मन्त्रसिद्धि की कुंजी" माना गया है। इसका जप साधक को अदृश्य शक्ति, रक्षा, त्वरित फल, और मन्त्रसिद्धि प्रदान करता है। 🔱 1. सिद्धकुञ्जिका स्तोत्र का परिचय विषय विवरण स्रोत रुद्रयामल तन्त्र / देवीतन्त्र स्वरूप संक्षिप्त — ~20 श्लोक महत्त्व सम्पूर्ण चण्डी/दुर्गा सप्तशती के फल को समाहित करता है देवता चामुण्डा, भैरवी, महामाया विशेषता यह स्तोत्र स्वयं देवी की वाणी मानी...
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भय, रोग, दुर्भाग्य, तंत्र-बाधा, दुर्घटना, दरिद्रता दूर करने वाला अचूक मंत्र साधना

॥ श्रीरामरक्षास्तोत्रम् पुरश्चरण विधि ॥— यह एक अत्यंत शक्तिशाली तंत्रोपनिषद् स्तोत्र है, जिसकी रचना बुद्ध कौशिक ऋषि द्वारा की गई है। श्रीरामरक्षास्तोत्र का पुरश्चरण भय, रोग, दुर्भाग्य, तंत्र-बाधा, दुर्घटना, दरिद्रता तथा समस्त कष्टों से रक्षा करता है, और भक्ति, शक्ति, शांति तथा समृद्धि प्रदान करता है। 🕉️ 1. श्रीरामरक्षास्तोत्र का स्वरूप कुल श्लोक: ~38 (मुख्य स्तोत्र), कुल पंक्तियाँ ~220 देवी/देवता: श्रीरामचन्द्र जी, लक्ष्मण, सीता, हनुमान सहित रचयिता: महर्षि बुद्ध कौशिक स्रोत: श्रीरामरक्षास्तोत्र (तन्त्र उपनिषद् संहिताओं में वर्णित) 🎯 2. पुरश्चरण का उद्देश्य और लाभ उद्देश्य लाभ मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक रक्षा...
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