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आयुर्वेदिक विज्ञान का ज्योतिष्य महत्व

आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान कहते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि यह विज्ञान मात्र शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य संवर्धन का ही विवेचन नहीं करता, अपितु मनुष्य के आर्थिक, सामाजिक, मानसिक एवं बौद्धिक स्वास्थ्य की विवेचना भी इसका उद्देश्य है। कहा है: ”शरीरेन्द्रिय सत्वात्म संयोगो आयुः“ शरीर के साथ सत्वात्म की विवेचना ही व्यक्तित्व विवेचना है। सत्वात्म का विभिन्न परिमाणों में सम्मिश्रण ही व्यक्तित्व के बहुविध स्वरूपों का प्रदर्शन है। इस व्यक्तित्व के विकास के लिए स्वतंत्र रूप से भूत विद्या नामक चिकित्साशास्त्र की अवधारणा संहिताकारों ने की जिसका मूल स्रोत...
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ग्रहों का बलवान एवं अच्छी स्थिति में होना सफलता की कुंजी क्यों है?

अगर लग्न एवं लग्नेश बलवान है तो वह व्यक्ति स्वयं ऊर्जावान एवं क्षमतावान होगा और उसकी प्रतिकूल परिस्थितियों एवं बाधाओं से निपटने की क्षमता तथा प्रतिरोधात्मक शक्ति भी दुगनी होगी जिससे वह अपना बचाव करते हुए आगे बढ़ने का रास्ता निकाल सकता है। लग्न एवं लग्नेश के निर्बल होने पर उनकी प्रतिरोधक क्षमता नगण्य हो जाती है और उसे थोड़ा भी प्रतिकूल प्रभाव अधिक महसूस होता है। फलस्वरूप उसकी प्रगति में गतिरोध उत्पन्न हो जाता है। इस बात को इस प्रकार समझा जा सकता है कि अगर किसी पहलवान को...
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बच्चों के जीवन और कैरिअर को सही दिशा

इसी महीने बच्चों की परीक्षा का समय आ गया है। हम अपनी जिंदगी में आजकल इतना व्यस्त हो चुके हैं कि हमें अपने भविष्य को बनाने के अलावा और किसी बात की चिंता ही नहीं होती, जिसके कारण पारिवारिक जीवन अंदर ही अंदर खराब होता रहता है। पति-पत्नी में भी आए-दिन क्लेश होते रहते हैं, कई बार तो बच्चों की पढ़ाई की वजह से घर में क्लेश बड़ा रूप ले लेता है जिसके कारण पति-पत्नी में भी तनाव बन जाता है। बच्चों की पिटाई करना भी अच्छा नहीं लगता, क्योंकि...
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