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सकारात्मक सोच सफलता की कुंजी – करें तीसरे स्थान को मजबूत –

स्वास्थ्य की कुंजी सकारात्मक सोच है। सोच और स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। मनुष्य की सोच का उसके स्वास्थ्य पर बहुत गहरा असर पड़ता है। इंसान जैसा सोचता है, उसका शरीर वैसी ही प्रतिक्रिया करता है। नकारात्मक सोच शरीर को अस्वस्थ बनाती है। प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है। सकारात्मक सोच शरीर को स्वस्थ और तनावमुक्त रखती है। ज्यादा सोचने से भूलने की प्रक्रिया विकसित होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों निपटने का अच्छा तरीका यह है कि आप सकारात्मक और विजय प्राप्त करने वाले विचारों से काम लें। सकारात्मक विचारों...
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हिंदू संस्कृति में पंचांग का महत्व

हिंदू संस्कृति में पंचांग का अपना विशेष महत्व है। जीवन के विभिन्न संस्कारों, यात्राओं, किसी कार्य के आरंभ आदि में पंचांग की सहायता ली जाती है। उद्देश्य केवल एक होता है - व्यक्ति और समाज के जीवन को सुखमय बनाना। अयन, विषुव, ऋतु, सौर एवं चंद्र, पक्ष, तिथि (सूर्य एवं चंद्र उदयास्त सहित), दिनमान, रात्रिमान और नक्षत्र पंचांग के मुख्य अंग हैं। इन सारे तथ्यों का विश्लेषण गणित के आधार पर किया जाता है। सौर मास से संक्रांतियां, षष्ठि, संवत्सर और वारों के आकलन को भी इस व्यवस्था से जोड़कर...
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ज्योतिष विद्या का मेरुदंड “नक्षत्र”

ज्योतिष विद्या का मेरुदंड ”नक्षत्र“ है। ऋषियों एवं आचार्यों ने सर्वप्रथम नक्षत्र आधारित ज्योतिषीय सिद्धांत ही प्रतिपादित किए थे। ”न क्षरति न सरति इति नक्षत्र“। नक्षत्रों के विभिन्न विभाजनों पर आधारित फलित के सूत्र दिए गए हैं। इसी में एक विभाजन 3020‘ या 200 कला का है। यहां 27 नक्षत्र 108 चरणों में विभक्त हैं। विशेष स्थिति का नक्षत्र विशेष फलद होता है और सूक्ष्मता के लिए नक्षत्र का विशेष चरण महत्वपूर्ण होता है। जैसे 64वां चरण (नवांश) अति प्रचारित है जो आपके संज्ञान में होगा। 27 नक्षत्रों में निम्नलिखित...
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