रक्षणं करोतु भगवति
॥ श्रीभगवतीस्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (श्री आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्र – “नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे...”) यह स्तोत्र मातृतत्त्व की करुणामयी, ज्ञानस्वरूपा और रक्षास्वरूपा भगवती की स्तुति है। इसे “श्रीभगवतीस्तोत्रम्” या “नमस्ते शरण्ये स्तोत्र” भी कहते हैं। इसका पुरश्चरण करने से भीति विनाश, चित्तशुद्धि, आत्मरक्षा, देवीकृपा, और ज्ञानप्राप्ति होती है। 🔱 1. श्रीभगवतीस्तोत्रम् का स्वरूप व महत्त्व तत्त्व विवरण ✍🏻 रचयिता श्री आदि शंकराचार्य 🌺 देवी रूप करुणामयी, शरणागतवत्सला, रक्षारूपिणी 📜 श्लोक 12 (कुछ पाण्डुलिपियों में 9) 🪔 प्रयोजन भय निवारण, रक्षाकवच, भक्तिरक्षा, स्त्रीशक्ति आराधना 🧠 स्वरूप करुणा, अद्वैत-भावना से...