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रक्षणं करोतु भगवति

॥ श्रीभगवतीस्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (श्री आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्र – “नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे...”) यह स्तोत्र मातृतत्त्व की करुणामयी, ज्ञानस्वरूपा और रक्षास्वरूपा भगवती की स्तुति है। इसे “श्रीभगवतीस्तोत्रम्” या “नमस्ते शरण्ये स्तोत्र” भी कहते हैं। इसका पुरश्चरण करने से भीति विनाश, चित्तशुद्धि, आत्मरक्षा, देवीकृपा, और ज्ञानप्राप्ति होती है। 🔱 1. श्रीभगवतीस्तोत्रम् का स्वरूप व महत्त्व तत्त्व विवरण ✍🏻 रचयिता श्री आदि शंकराचार्य 🌺 देवी रूप करुणामयी, शरणागतवत्सला, रक्षारूपिणी 📜 श्लोक 12 (कुछ पाण्डुलिपियों में 9) 🪔 प्रयोजन भय निवारण, रक्षाकवच, भक्तिरक्षा, स्त्रीशक्ति आराधना 🧠 स्वरूप करुणा, अद्वैत-भावना से...
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भक्ति नहीं, अपितु ज्ञान, वैराग्य और मोक्षबोध का दिव्य संगम है ये उपाय

॥ भज गोविन्दम् (मोह मुद्गरः) पुरश्चरण साधना विधि ॥ (रचयिता: श्री आदि शङ्कराचार्य) “भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते…” — यह स्तोत्र केवल भक्ति नहीं, अपितु ज्ञान, वैराग्य और मोक्षबोध का दिव्य संगम है। ‘मोहमुद्गरः’ नाम से विख्यात, यह मोह के भ्रम को तोड़ने वाली वाणी है। इसका पुरश्चरण जीवन की दिशा और दृष्टि दोनों बदल सकता है। 📘 1. भज गोविन्दम् का स्वरूप व महत्त्व तत्व विवरण ✍🏻 रचयिता श्री आदि शङ्कराचार्य 🕉️ विषय वैराग्य, मोहमुक्ति, गोविन्द भक्ति 📜 श्लोक कुल ~33 श्लोक (12 प्रमुख + शिष्यकृत 14–21)...
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शिवतत्त्व जागरण के लिए क्या करें ?

॥ श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् – पुरश्चरण साधना विधि ॥ (रचयिता: रावणेश्वर रावण) "जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले..." — यह स्तोत्र शिव के रौद्र, नटराज, अघोर और ताण्डव स्वरूप का गहन स्तवन है। इसे साधना पूर्वक पढ़ने से शिवानुभूति, बल, वाणीशक्ति, दुःख विनाश, तामस-शुद्धि और भक्ति-वीर्य की प्राप्ति होती है। 🔱 1. शिवताण्डव स्तोत्र का स्वरूप व महत्त्व: तत्व विवरण ✍🏻 रचयिता रावण – परम शिवभक्त 🔥 शैली वीरोदात्त छन्द, ताण्डव लय में 🕉️ स्तोत्र 16 श्लोक + फलश्रुति 📿 प्रयोजन वाणी सिद्धि, तामस शुद्धि, शिव कृपा, शक्ति जागरण 🪔 बीज मंत्र "ॐ नमः...
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मृत्यु, बीमारी आदि के भय का चमत्कारिक समाधान

  ॥ श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (रचयिता: श्री आदि शंकराचार्य) "न - नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय... म - मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय..." — इस प्रकार "नमः शिवाय" पंचाक्षर मंत्र के प्रत्येक अक्षर से युक्त यह स्तोत्र, शिवभक्ति, शुद्धि, मोक्ष और शिवतत्त्व की अनुभूति के लिए अत्यंत प्रभावकारी है। 🔱 1. शिव पंचाक्षर स्तोत्र का महत्त्व विशेषता विवरण 🔹 मन्त्र नमः शिवाय — शिवतत्त्व का मूल बीज 🔹 स्तोत्र हर श्लोक पंचाक्षर (न-म-शि-वा-य) को समर्पित 🔹 फल भक्तिपूरक, शुद्धिकारी, मृत्यु भय नाशक, मोक्षदायक 🔹 स्वरूप केवल 6 श्लोक + 1 फलश्रुति 🗓️...
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श्रीविद्या त्रिपुरा, महात्रिपुरा, सुंदरी देवी के ध्यान, कृपा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक बहुत ही रहस्यमय साधना है।

॥ श्री आनन्दलहरी स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (श्री आदि शंकराचार्य विरचित) "शिवः शक्त्यायुक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं..." से आरंभ आनन्दलहरी, श्रीविद्या की मूलाधार साधना है। यह स्तोत्र श्रीविद्या, त्रिपुरा, महात्रिपुरसुन्दरी देवी के ध्यान, कृपा और आत्मिक उत्थान हेतु अत्यंत रहस्यमय, शक्तिशाली और शुभकारी है। 📚 1. आनन्दलहरी क्या है? श्री आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रथम ४१ श्लोकों का संकलन – 🔹 आनन्दलहरी = “शिव-शक्ति” के आनंदमय तत्त्व की वाणी 🔹 यह श्रीविद्या, कुण्डलिनी जागरण और महात्रिपुरसुन्दरी कृपा का प्रवेशद्वार है। 📜 पूर्ण संग्रह: श्लोक संख्या: 41 कई साधक सौंदर्यलहरी...
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मृत्यु का भय, रोग, संकट, ग्रह प्रभाव, तंत्र प्रहार, एकमात्र समाधान

  ॥ श्री महामृत्युंजय स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥ (श्रीमार्कण्डेय ऋषि रचित, अमोघ स्तोत्र) महामृत्युंजय स्तोत्र मृत्यु भय, रोग, संकट, ग्रहबाधा, तंत्र-आक्रमण, दीर्घायु व परम शिव कृपा हेतु अत्यंत प्रभावकारी है। यह महामृत्युंजय मंत्र की ही स्तुतिपरक स्तोत्र-रूप व्याख्या है। 🔱 1. पुरश्चरण क्या है? पुरश्चरण का अर्थ है — किसी मंत्र या स्तोत्र का एकाग्र भाव, नियम, जप संख्या, पूजन, हवन, तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोजन सहित पूर्ण अनुष्ठान। 👉 साधक को स्तोत्र की पूर्ण फलप्राप्ति व शिवकृपा हेतु यह श्रेष्ठ उपाय है। 📜 2. महामृत्युंजय स्तोत्र का परिचय:...
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जीवन की रक्षा, समर्पण और मोक्ष के लिए भवानी की कृपा का अद्वितीय उपाय

॥ भवान्यष्टकम् पुरश्चरण विधि ॥ (श्री आदि शंकराचार्य कृत अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र) "नाथैः अनाथशरणं..." से प्रारम्भ यह स्तोत्र माँ भवानी की कृपा, रक्षा, आत्म-समर्पण और जीवनोद्धार हेतु अद्वितीय है। 🕉️ 1. पुरश्चरण क्या है? "पुरश्चरण" का अर्थ है — किसी मंत्र/स्तोत्र का निश्चित नियम, संख्या व विधि से जप/पाठ, साथ में हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन आदि करने का संकल्पपूर्ण अनुष्ठान। 👉 इससे स्तोत्र की पूर्ण सिद्धि और कृपा प्राप्त होती है। 📅 2. कब करें? (श्रेष्ठ समय) समय कारण नवरात्र (विशेषकर शारदीय या चैत्र) शक्ति-साधना हेतु श्रेष्ठ अष्टमी,...
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(शिव कृपा, रोगों का नाश, भय निवारण, तीर्थ-तुल्य पुण्य एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए) जबरदस्त उपाय

॥ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र पुरश्चरण साधना विधि ॥ (शिव कृपा, रोग नाश, भय-निवारण, तीर्थफल-समान पुण्य व आत्मिक उत्थान हेतु) 🔱 1. क्या है "पुरश्चरण"? पुरश्चरण का अर्थ है — किसी स्तोत्र या मंत्र की नियत संख्या में जप/पाठ के साथ साधना, ध्यान, हवन, तर्पण और भोजन आदि का समुच्चय। इससे स्तोत्र की पूर्ण शक्ति (सिद्धि) साधक को प्राप्त होती है। 🕉 2. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र – परिचय: यह आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्र है, जिसमें भारत के १२ प्रमुख शिवलिंगों का स्तवन है। इसका नित्य जप तीर्थस्नान, दान, व्रत और लिंगदर्शन...
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