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ज्योतिष विद्या का मेरुदंड “नक्षत्र”

ज्योतिष विद्या का मेरुदंड ”नक्षत्र“ है। ऋषियों एवं आचार्यों ने सर्वप्रथम नक्षत्र आधारित ज्योतिषीय सिद्धांत ही प्रतिपादित किए थे। ”न क्षरति न सरति इति नक्षत्र“। नक्षत्रों के विभिन्न विभाजनों पर आधारित फलित के सूत्र दिए गए हैं। इसी में एक विभाजन 3020‘ या 200 कला का है। यहां 27 नक्षत्र 108 चरणों में विभक्त हैं। विशेष स्थिति का नक्षत्र विशेष फलद होता है और सूक्ष्मता के लिए नक्षत्र का विशेष चरण महत्वपूर्ण होता है। जैसे 64वां चरण (नवांश) अति प्रचारित है जो आपके संज्ञान में होगा। 27 नक्षत्रों में निम्नलिखित...
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बच्चों का पढाई में मन क्यूँ नहीं लगता : ज्योतिष्य विश्लेषण

बच्चों के पढ़ाई में मन नहीं लगने के कारण माता-पिता चिंतित रहते हैं, जो स्वाभाविक है। इसका एक कारण चित्त की चंचलता हो सकती है। दूसरा कारण मन के कारक चंद्र का दुर्बल होना होता है। वहीं मन का प्रतिनिधित्व करने वाले दूसरे भाव या उसके स्वामी का पीड़ित होना भी इसका एक कारण है। शिक्षा के कारण ग्रहों बृहस्पति (ज्ञान) और बुध (बुद्धि) अशुभ होने की स्थिति में भी जातक की शिक्षा अधूरी रह सकती है। यहां मन के कारक चंद्र की उन विभिन्न स्थितियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत...
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प्रकृति एवं ज्योतिष ग्रह योग

न केवल भारतीय सनातन परम्परा में बल्कि शिव की अन्य संस्कृतियों में भी ‘आदि-मिथुन’ की कल्पना की गई है। चाहे वह पाश्चात्य संस्कृति में उपलब्ध एडम और ईव हों अथवा स्वयम्भुवन् मनु और सद्रूपा। मानव जाति को स्त्री-पुरुष द्वन्द्वात्मक स्वरूप में ही स्वीकृत किया गया है। मानव जाति और सभ्यता के लाखों वर्षों के विकासक्रम में स्त्री-पुरुष के अतिरिक्त एक अन्य प्रकृति भी अस्तित्व में आ गई है। यह प्रकृति स्त्री और पुरुष के मध्य की है और अपने हाव-भाव, व्यवहार, चिंतन, पसंद-नापसंद के आधार पर इन्होंने समाज में अपना...
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सेना में कैरिअर

शास्त्रों में सेना के व्यवसाय का संबंध क्षात्र धर्म से है। इस धर्म को भगवद्गीता में इस प्रकार परिभाषित किया गया है- शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्षयं युद्देचाप्यपलायनम् । दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।। यह सभी गुण परंपरागत रूप से मंगल ग्रह से जुड़े होते हैं। मंगल शक्ति, पराक्रम, साहस व शौर्य का प्रतीक है। सेना विभाग में उत्कृष्टता सिद्ध करने के लिए साहस सबसे बड़ी सम्पदा है। मंगल प्रधान व्यक्ति अपनी प्रतिभा को प्रत्येक ऐसी जगह पर आसानी से सिद्ध कर लेता है जहां वीरता ही श्रेष्ठता का मापदण्ड हो। ज्योतिष में...
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नींद ना आना परेषानियों की जड़ कारण आपकी कुंडली में –

शरीर थकावट से चूर-चूर है, पर दिन भर के कामकाज के बाद रात में जब आप बिस्तर पर जाती हैं तो नींद को आंखों से कोसों दूर पाती हैं। आखिर नींद न आने का क्या है कारण क्या है दिन भर की थकान के बाद हर व्यक्ति की यही इच्छा होती है कि उसे अच्छी और भरपूर नींद आए, लेकिन तब काफी तकलीफदेह स्थिति होती है, जब सोने की सारी कोशिशें बेकार होती नजर आती हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि रात में 7-8 घंटे की नींद अच्छे स्वास्थ्य के...
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स्वावलंबी बनने हेतु तकनीकी ज्ञान की प्राप्ति के लिए करायें कुंडली का विष्लेषण –

जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न ही रोटी अर्थात रोजगार है, और हम इस पहले मोर्चे पर ही असफल साबित हो जाए। वर्तमान डिग्री प्राप्त करने से ईतर स्वावलंबन परक शिक्षा की प्राप्ति कर स्वावलंबी बनने की दिषा में प्रयास करना चाहिए। जिस समय कालपुरुष की कुंडली में शनि जो कि नवीन अन्वेषण का कारक होता है। अतः शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ नया करते हुये ऐसी शिक्षा देने का प्रयास करना चाहिए जिससे डिग्री या ज्ञान के साथ-साथ समर्थवान बन सके... ज्योतिषीय गणनाओं का सहारा लेते हुए रोजगार मूलक...
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फलादेश मे कारक ग्रहों का महत्व

जन्म कुण्डली के बारह भावों से भिन्न-भिन्न बातों को देखा जाता है। ज्योतिष का मूल नियम यह है कि भाव की शुभाशुभता का विचार भाव और भावेश की बलवत्ता और उस पर पड़ने वाली अन्य ग्रहों की युति एवं दृष्टि द्वारा निर्णित होता है साथ ही नित्य कारक ग्रहों से भी भाव की शुभाशुभता का विचार करते हैं। इस प्रकार भाव, भावेश और कारक इन तीनों के संयुक्त प्रभाव के फलस्वरूप भाव फल का निश्चय किया जाता है। यहां हम कारक और उनके महत्व की चर्चा करेंगे। कारक दो प्रकार...
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ग्रहों का राशियों पर प्रभाव

ग्रहों के स्वभावानुसार उनके बलाबल को निश्चित करने में ग्रहों द्वारा अधिष्ठित राशि बहुत महत्व रखती है। दूसरे शब्दों में ग्रहों की कार्य प्रणाली, ग्रहों द्वारा अधिष्ठित राशि के तत्वों, राशि कार्य की रीति या ढंग तथा राशि की ध्रुवता पर निर्भर होती है। ग्रह तो केवल विशेष प्रकार के ऊर्जा पुंज हैं। इन ऊर्जा पुंजों को गति, अभिव्यक्ति व क्रियाशीलता तो उनके द्वारा अधिष्ठित राशियों के गुण धर्मों के अनुरूप ही होती है। राशि तत्व उस राशि में ग्रह के चेतन तत्व की अभिव्यक्ति को दर्शाता है। अर्थात् वह...
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