Archive

Month: May 2015

धर्म-अर्थ-काम जीवन के तीन लौकिक पुरुषार्थ

भारतीय संस्कृति का मूल धर्म ही है। बल्कि कहना चाहिए कि भारतीय संस्कृति का प्राण धर्म है। दूसरे देशों की संस्कृति में जहां भौतिक तत्व की प्रधानता है, वहीं भारतीय संस्कृति में धर्म की प्रधानता है। इसलिए वह आध्यात्मिक संस्कृति है। धर्म शब्द को परिभाषा में बांधना कठिन ही नहीं…

छत्तीसगढ़ का प्रयाग: राजिम कुंभ

  श्रद्घालुओं की अनगिनत आस्था, संतों का आशीर्वाद और कलाकारों के समर्पण का ही परिणाम है कि राजिम-कुंभ ने देश में अपनी पहचान नए धार्मिक और सांस्कृतिक संगम के तौर पर कायम कर की है। गुजिस्ता कुछ सालों में राजिम कुंभ की ख्याति देश-दुनिया में फैली है, यह मध्य भारत…

राजिम की कथा:

  त्रेता युग से भी एक युग पहले अर्थात सतयुग में एक प्रजापालक अनन्य भक्त था। उस समय यह क्षेत्र पद्मावती क्षेत्र या पद्मपुर कहलाता था। इसके आसपास का इलाका दंडकारण्य के नाम से प्रसिद्ध था। यहां अनेक राक्षस निवास करते थे। राजा रत्नाकर समय-समय पर यज्ञ, हवन, जप-तप करवाते…

वास्तु शास्त्र में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ ??????

वास्तु’ का सहज शाब्दिक अर्थ एक ऐसे आवास से है जहां के रहवासी सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध हों। इसीलिए वास्तु विज्ञान में हमारे पूर्वजों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे अनेक तथ्यों को शामिल किया है जो कि किसी भी भवन के रहवासियों को शांतिपूर्वक रहने में परम सहायक होते…

आपकी आय और आपकी कुंडली में योग –

आपकी आय और आपकी कुंडली में योग – किसी जातक का आजीविका का साधन क्या हो सकता है। यह उसकी कुंडली से जाना जा सकता है। कई बार देखने में आता है कि जातक की षिक्षा किसी क्षेत्र में होती है और उसकी नौकरी का क्षेत्र उस षिक्षा से बिल्कुल…

प्रेम विवाह का ज्योतिष कारण

प्रेम विवाह का ज्योतिष कारण – सृष्टि के आरंभ से ही नर और नारी में परस्पर आकर्षण विद्यमान रहा है, जिसे प्राचीन काल में गंर्धव विवाह के रूप में मान्यता प्राप्त थी। आज के आधुनिक काल में इसे ही प्रेम विवाह का रूप माना जा सकता है। इस विवाह में…

बटुक भैरव मंत्र

बटुक भैरव मंत्र ॐ ह्रीं बम बटुकाय आपददुधारनाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं बम ॐ मंत्र जाप विधि- बिना नमक की आटे की लोई का दिया बनाये दिए में सरसों या तिल का तेल डालकर उस दिए के सामने बैठकर इस मंत्र का ११ माला जाप १८ दिन तक करें प्रत्येक…

इशान कोण और कर्ज वास्तु का अर्थ हमारी भाषा में सिर्फ इतना ही है की वास्तव में ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में हो; क्योंकि पंच तत्वों में निर्मित शरीर को यतिपिंडे तत्व्ब्रह्मंडे के सिधांत के अनुसार देखें तो जो कुछ इस ब्रह्माण्ड में है, वह इस शरीर में मौजूद…

भारतीय दर्शन के कुछ खास तथ्य

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं – 1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन 4. नकुल। 5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त…

ग्रह और बीमारी   ग्रह और बीमारी मनुष्य के मन, मस्तिष्क और शरीर पर मौसम, ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव लगातार रहता है। कुछ लोग इन प्रभाव से बच जाते हैं तो कुछ इनकी चपेट में आ जाते हैं। बचने वाले लोगों की सुदृढ़ मानसिक स्थिति और प्रतिरोधक क्षमता का…

जानें मंगल दोष के बारे में और दूर करने के उपाय जब कुंडली में हो मंगल दोष–मंगली दोष कैसे करें दूर? यदि प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्ठम व द्वादश भावों में कहीं भी मंगल हो तो उसे मंगल दोष कहा जाता है लेकिन उन दोषों के बावजूद अगर अन्य ग्रहों की…

कल्याणकारी सूर्य स्तोत्र जो आपको जीवन में सुखी और सम्पन्नता प्रदान करेगी विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः। लोक प्रकाशकः श्री माँल्लोक चक्षुर्मुहेश्वरः॥ लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्ता हर्ता तमिस्रहा। तपनस्तापनश्चैव शुचिः सप्ताश्ववाहनः॥ गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृतः। एकविंशतिरित्येष स्तव इष्टः सदा रवेः॥……………………………. ‘विकर्तन, विवस्वान, मार्तण्ड, भास्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान, लोकचक्षु, महेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोके…श,…

आपकी कुंडली में दशम स्थान और राशियों का हाल किसी भी जातक की कुंडली में चार केंद्र स्थान प्रथम, चतुर्थ, सप्तम व दशम भाव होता है। दशम भाव कर्म भाव भी कहलाता है। अतः जातक के जीवन में इसका विशेष प्रभाव होता है। कुंडली में दशम घर से कर्म, आत्मविश्वास,…

अंक ज्योतिष से जानें की आपको कौन सा रत्न धारण करना चाहिए अंक ज्योतिष के अनुसार आपके लिए शुभ रत्न इस प्रकार है- 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है- माणिक्य रत्न शुभ रहेगा। 2, 11, 20, 29 का मूलांक- 2, स्वामी चंद्रमा- रत्न मोती 3,…

जानें क्या है सप्तम भाव और उसके फल   सप्तम भाव विवाह और गृहस्थी के सुख की दृष्टि से बड़ा ही महत्वपूर्ण भाव है। जितना महत्व इसमें उपस्थित राशि और इसमें बैठे ग्रह का है, उतना ही महत्व इस पर दृष्टि रखने वाले ग्रहों के प्रभाव का भी होता है।…

कुंडली के किस भावों में मंगल दोष और उसके उपाय जिस जातक की जन्म कुंडली, लग्न/चंद्र कुंडली आदि में मंगल ग्रह, लग्न से लग्न में (प्रथम), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम तथा द्वादश भावों में से कहीं भी स्थित हो, तो उसे मांगलिक कहते हैं। गोलिया मंगल ‘पगड़ी मंगल’ तथा चुनड़ी मंगल…

अपने भवन या घर में वास्तु दोष कैसे पहचाने   भवन निर्माण एवं वास्तु विज्ञान दो अलग अलग विषय हैं। एक व्यक्ति अपने मनोनुकूल गृह का निमार्ण तो करवा सकता है अपने आर्किटेक्ट या डिज़ाइनर से कहकर उसे अच्छी प्रकार से सजा भी सकता है परन्तु वह उसमें रहने पर…

वास्तु से पाएँ जीवन सुख और समृद्धि प्रत्येक मनुष्य अपना जीवन आनन्दमय, सुखी व समृद्ध बनाने में हमेशा लगा रहता हैं । कभी-कभी बहुत अधिक प्रयास करने पर भी वह सफल नहीं हो पाता हैं । ऐसे में वह ग्रह शांति, अपने ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करता हैं ।…

पितृदोष का एक प्रमुख कारण भू्रण हत्या – पितृदोष का एक प्रमुख कारण भू्रण हत्या – वैदिक शास्त्रों तथा पुराणों में सौभाग्यवती पतिव्रता नारी तथा कुमारी कन्याओं को देवी का प्रतीक माना गया है, वहीं मनुस्मृति में तो यहाँ तक कह दिया है कि- ‘‘एक आचार्य दस अध्यापकों से श्रेष्ठ…

होलिका की पूजा के लाभ- होलिका की पूजा के लाभ- होली के पर्व को नवसंवत्सर का आरम्भ तथा वसन्तागम के उपलक्ष में किया हुआ यज्ञ भी माना जाता है। होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिंदूपंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा…

विकृत मानसिकता का ज्योतिषीय कारण- विकृत मानसिकता का ज्योतिषीय कारण- किसी भी तरह से क्रूर कर्म करने वाले वास्तव में कोई शातिर अपराधी नहीं बल्कि विकृत मानसिकता वाले आम लोग ही होते है, जब भी ऐसे व्यक्तियों की मर्जी से कोई कार्य नहीं होता या उनका मकसद पूरा नहीं होता…

क्या अच्छे दिन आयेंगे: ज्योतिषीय गणना संसद में पेश वित्तीय बजट में आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिये कारोबारी माहौल सुधारने और कर दरों को नरम रखने का दावा पेष करते हुए एनडीए सरकार का पहला पूर्ण आम बजट पेश किया। इसमें कॉरपोरेट जगत, गांव और…

बच्चों में कार्टून देखने का आकषर्ण और ज्योतिष- बच्चों में कार्टून देखने का आकषर्ण और ज्योतिष- एकल परिवार और पड़ोसियों तथा रिष्तों में बढ़ती दूरी ने टेलीविजन को भारतीय परिवार का एक महत्वपूर्ण सदस्य बना दिया है। महिलाएं अक्सर टीवी सीरियल की काल्पनिक दुनिया में खोई रहना चाहती हैं। पुरुष…

आमलकी एकादशी अथवा रंगभरी एकादषी – आमलकी एकादशी अथवा रंगभरी एकादषी – भारतीय शास्त्र बहुत उन्नत है इसका हर दिन और प्रत्येक व्रत-त्योहार का अपना एक अलग महत्व है। आजकल लोग आधुनिकता के कारण अपने संस्कार और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। मेरा संकल्प है कि मैं इस…

विवाह में सप्तम भाव का महत्व सप्तम भाव को विवाह का भाव कहा जाता है. इस भाव से संबन्ध रखने वाले ग्रह वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते है. सप्तम भाव की राशि, इस भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति के जीवनसाथी के स्वभाव व आचरण को दर्शाते हैं. विवाह भाव, विवाह…

अध्ययन कक्ष को बनाएँ वास्तु अनुरूप वार्षिक परीक्षाओं की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। ऐसे में विद्यार्थी अपने अध्ययन कक्ष को वास्तु अनुरूप बनाकर अच्छी सफलता हासिल कर सकते हैं। वास्तु नियम सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और पढ़ाई में रुचि को बढ़ावा देते हैं। जीवन को सफल…

जानिए की क्या हैं माघ पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा का महत्व..???   हिन्दू धर्म में धार्मिक दृष्टि से माघ मास को विशेष स्थान प्राप्त है। भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चंद्रमास और दसवां सौरमास माघ कहलाता है।मघा नक्षत्र से युक्त होने के कारण इस महीने का नाम का माघ नाम पडा।…

स्वामी विवेकानंद: युवाओं के प्रेरणास्त्रोत और मार्गदर्शक कलकत्ता में 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद । स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, आधुनिक भारत के एक महान युवा संन्यासी और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे । स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863 को कलकत्ता में एक कायस्थ…

दाम्पत्य/वैवाहिक सुख के उपाय—- दाम्पत्य/वैवाहिक सुख के उपाय—- —-यदि जन्म कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान स्थित मंगल होने से जातक को मंगली योग होता है इस योग के होने से जातक के विवाह में विलम्ब, विवाहोपरान्त पति-पत्नी में कलह, पति या पत्नी के स्वास्थ्य में क्षीणता, तलाक एवं…

सुखी विवाह का विज्ञान सुखी विवाह का विज्ञान क्या वजह है कि कुछ दंपत्तियों का वैवाहिक जीवन विवाह के वर्षों बाद भी पहले जैसा ही बना रहता है. कुछ दंपत्ति विवाह के कुछ समय बाद ही अलग हो जाते हैं परंतु कुछ दंपत्तियों के लिए वह जन्मों का बंधन बन…