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Month: June 2015

The Hero of Indian Politics Arwind kejriwal

  His birth rashi Taurus is the bull. Starting from June 2012, the difference in Guru Venus.Perhaps that was the time when arwind was with anna and he was writting the script of august revolution.The event will run until January 2015. Arvind and Anna were sitting in sitting in parliament…

Keep this tips in mind for office

Keep in mind these matters in office 1. Never sit and back toward the door. 2. beam neither sit down nor work. 3. Sitting in his cabin and face north or the south-west corner of East remain. 4. your room / cabin southwest corner never leave empty. Keep the file…

प्रदोष व्यापिनी अमावस्या –

प्रदोष व्यापिनी अमावस्या – मार्गषीर्ष मास की अमावस्या को अपने पितरों तथा पूर्वजो को पूजन, याद करने तथा उनकी मुक्ति हेतु दान करने का होता है। इस माह में किए गए दान एवं पूण्य जीवन में सुख तथा समृद्धिदायी होती है साथ ही कष्टों को दूर करने वाली होती है।…

संबंधों को अनुकूल कर जीवन में सुख प्राप्त करें

संबंधों को अनुकूल कर जीवन में सुख प्राप्त करें – ग्रह, नक्षत्र हमारे आपसी रिष्तों पर अपना पूरा प्रभाव डालते हैं। इस संबंध में ज्योतिषषास्त्र में पर्याप्त जानकारी प्राप्त होती है। कुंडली में प्रत्येक ग्रह से कोई ना कोई रिष्ता जुड़ा होता है तथा प्रत्येक भाव से रिष्तेदारो की स्थिति…

आधुनिक जीवन की जटिलताएॅ और ज्योतिषीय उपाय

आधुनिक जीवन की जटिलताएॅ और ज्योतिषीय उपाय – सत्रहवीं शताब्दी को प्रबोधन का युग, अठारहवी शताब्दी को तर्क का युग, उन्नीसवीं शताब्दी को प्रगति का युग और बीसवीं शताब्दी को दुष्चिंता का युग कहा जाता है। सार्थक और संतोषप्रद जीवन का मार्ग कभी भी आसान नहीं था किंतु वर्तमान जीवन…

सामाजिक विकास से संबंधित ज्योतिष कारक –

सामाजिक विकास से संबंधित ज्योतिष कारक – मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज का एक सदस्य है और समाज के अन्य सदस्यों के प्रति प्रतिक्रिया करता है, जिसके फलस्वरूप समाज के सदस्य उसके प्रति प्रक्रिया करते हैं। यह प्रतिक्रया उस समय प्रकट होती है जब समूह के सदस्यों के…

कार्तिक पूर्णिमा –

कार्तिक पूर्णिमा – कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रदोषव्यापिनी उत्सव विधान से मनाने का आदि काल से महत्व है। पूर्णिमा का व्रत गृहस्थों के लिए अति शुभ फलदायी होता है। प्रायः स्नान कर व्रत के साथ भगवान सत्यनारायण की पूजा कथा कर दिनभर उपवास करने के उपरांत चंद्रोदय के…

बैकुंठ चतुदर्शी व्रत –

बैकुंठ चतुदर्शी व्रत – कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुदर्शी को पाप मुक्ति तथा बैकुण्ठ प्राप्ति हेतु बैकुंठ चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु की प्रियता के लिए किया जाता है। इस दिन निराहर रहते हुए भगवान विष्णु की प्रतिष्ठा कर कमल के फूल से विधिवत पूजा कर धूप, दीप…

कैसे करें अपनों में तनाव से बचाव

कैसे करें अपनों में तनाव से बचाव – आज की प्रतिद्धंदिता की स्थिति तथा लगातार हर क्षेत्र में परेषानी, कार्य का दबाव, समय की कमी, कुंठाओं और भौतिकसंपन्नता की चाहत के कारण व्यवहार का चिड़चिड़ापन तथा क्रोध ज्यादातर स्थिति में नजदीकी रिष्तों को प्रभावित करता है। जब व्यक्ति तनाव में…

प्रबोधनी एकादशी, तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक-

प्रबोधनी एकादशी, तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक- कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को प्रबोधनी या देवउठनी, तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक एकादशी के रूप में मनाई जाती है। देवात्थान एकादशी- माना जाता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए क्षीर सागर में शयन…

प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हेतु करें अष्म स्तोत्र का पाठ

प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हेतु करें अष्म स्तोत्र का पाठ:- सभी की चाह होती है कि उच्च पद तथा सम्मान अपने जीवन में प्राप्त करें। साथ ही यह चाह भी कि जीवन में स्थिरता बनी रहे।  इस का एक तरीका सरकारी नौकरी प्राप्त करना भी है। किंतु कई बार देखा…

एमबीए के किस क्षेत्र का चुनाव करें, जाने अपनी कुंडली से

एमबीए के किस क्षेत्र का चुनाव करें, जाने अपनी कुंडली से – इस वैष्वीकयुग में अनेक प्रकार के व्यवसायिक प्रतिष्ठान तथा कंपनियाॅ कार्य कर रहीं हैं। अब देष में ही बैठकर विदेषी कंपनियों में सर्विस प्राप्त करने के चांस उपलब्ध हैं। हर कंपनी में मार्केटिंग मैनेजमेंट, फायनेंस मैनेजमेंट, ह्मेन रिसोर्स…

गजेंद्र मोक्ष की स्तुति से प्राप्त करें धनसुख

गजेंद्र मोक्ष की स्तुति से प्राप्त करें धनसुख – अर्थस्य अर्थोलोके अर्थात् इस अर्थ युगीन दुनिया में कहीं ना कहीं धन की बड़ी महत्ता समझ में आती है। चाहें वें पारिवारिक रिष्तें हों या सामाजिक जिम्मेदारियाॅ सबकुछ पैसों पर आश्रित होता है। आर्थिक पक्ष के कमजोर होने पर सभी आवष्यक…

भाईदूज का त्योहार

भाईदूज का त्योहार कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई के कल्याण के लिए व्रत कर पूजा करती हैं और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है। आज के दिन बहन भाईयों को तेल मलकर नदी में स्नान करना चाहिए। इस दिन…

कार्तिक मास और गोवर्धन पूजा

कार्तिक मास और गोवर्धन पूजा -;अन्नकूटद्ध कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बलि पूजा, अन्नकूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी मनाये जाते हैं। अन्न कूट और गोवर्धन पूजा द्वापर में भगवान कृष्ण द्वारा प्रारंभ की गई। इस दिन गाय, बैल आदि पशुओं…

कार्तिक अमावस्या और दीपावली को महालक्ष्मी पूजन

कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इससे पूर्व लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए घरों की साफ-सफाई की जाती है। कहाॅ जाता है कि इस दिन भगवान रामचंद्र चैदह वर्ष का वनवास पूरा कर रावण को मारकर अयोध्या लौटे थे। अयोध्या वासियों ने खुशी में…

कार्तिक मास की नरक चतुदर्शी और यम की पूजा

आज के दिन नरक से मुक्ति पाने के लिए तेल लगाकर अपामार्ग के पौधे सहित जल में स्नान करना चाहिए और संध्या काल में दीप दान करना चाहिए। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का वध किया था। एक बार रंतीदेवी नामक राजा हुए थे। वे बड़े धर्मात्मा…

धनतेरस में कुबेर लक्ष्मी जी की पूजा

कार्तिक मास की त्रयोदशी धनत्रयोदशी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन धनवंतरी समुद्र से अमृत कलश लेकर आये थे, इसलिए वैद्य जन आज के दिन धनवंतरी की पूजा करते हैं और इसे धनवंतरी जयंती कहते हैं। आज के दिन धरतेरस के पूजन और दीपदान को विधि पूर्वक करने…

रंभा एकादषी व्रत

रंभा एकादषी व्रत – कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादषी को रंभा एकादषी के रूप में मनाया जाता है। इस एकादषी के व्रत को करने से अनेकों पापों को नष्ट करने में समर्थ माना जाता हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विधान है। इस व्रत के…

करक संतुष्टी व्रत

करक संतुष्टी व्रत – जिस प्रकार एकादषी तिथि को विष्णु भगवान तथा त्रयोदषी तिथि को षिवजी की तिथियाॅ मानी जाती हैं उसी प्रकार से कृष्णपक्ष की चतुर्थी को विध्यविनाषक गणेष भगवान की विषिष्ट तिथि होती है। प्राचीन काल में हल्दी को गणेष भगवान की मूर्ति के रूप में पूजा जाता…

वाराह चतुदर्शी व्रत

वाराह चतुदर्शी व्रत – आष्विन मास की शुक्ल पक्ष की चतुदर्शी को वाराह चतुर्दषी व्रत किया जाता है। भूत-प्रेत, पाप मुक्ति तथा सुख ऐष्र्वय प्राप्ति हेतु वाराह चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु के वाराह स्वरूप की प्रियता के लिए किया जाता है। इस दिन निराहर रहते हुए भगवान वाराह की…

पद्मनाथ द्वादषी पूजन – मनवांछित फल प्राप्ति का अचूक तरीका

पद्मनाथ द्वादषी पूजन – मनवांछित फल प्राप्ति का अचूक तरीका- आष्विनी शुक्ल मास भगवान विष्णु की पूजा तथा व्रत का मास माना जाता है इसकी द्वादषी में की गई पूजन, व्रत तथा दान बहुत फलदायी होता है। शास्त्रों में विष्णु की नाभी से उत्पन्न कमल को पद्मनाभ कहा गया। जिसमें…

पापांकुषा एकादषी

पापांकुषा एकादषी – आष्विन मास की शुक्लपक्ष की एकादषी को पापांकुषा एकादषी के रूप में मनाया जाता है। पद्यपुराण के अनुसार पाप रूपि हाथी को महावत रूपी अंकुष से बेधने के कारण इसका नाम पापांकुषा एकादषी पड़ा। चराचर प्राणियों सहित त्रिलोक में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है, जो…

विजयादसमी

विजयादसमी – विजय दसमी का व्रत या दषहरा का पर्व आष्विन मास की शुक्लपक्ष की दषमी को मनाया जाता है। इस पर्व को भगवती के ‘‘विजया’’ नाम पर विजय दषमी कहते हैं। इस दिन रामचंद्रजी ने लंका पर विजय प्राप्त की थी, इस लिए भी इस दिन को विजयदषमी कहा…

माॅ दुर्गा के पाॅचवें रूवरूप “माॅ स्कन्दमाता”

माॅ दुर्गा के पाॅचवें रूवरूप को स्कन्दमाता के नाम से मनाया जाता है। ये भगवान स्कन्द ‘‘कुमार कार्तिकेय’’ , जोकि प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे तथा शक्तिधर के नाम से जिनकी महिमा है, इन स्कन्द की माता के रूप में पूजी जाती हैं। देवी के विग्रह…

आरोग्य और यष की देवी-माॅ कूष्माण्डा

आरोग्य और यष की देवी-माॅ कूष्माण्डा – माॅ दुर्गा के चैथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद्र हल्की हॅसी द्वारा अण्ड अर्थात् ब्रम्हाण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। देवी कूष्माण्डा ने ही अपने ‘ईषत्’ हास्य द्वारा ब्रम्हाण्ड की उत्पत्ति…

माॅ दुर्गा जी के तीसरे शक्तिरूप का नाम ‘‘माॅ चंद्रघण्टा”

माॅ दुर्गा जी के तीसरे शक्तिरूप का नाम ‘‘चंद्रघण्टा’’ है। नवरात्रि उपासना में तीसरे तीन परम शक्तिदायक और कल्याणकारी स्वरूप की आराधना की जाती है। इनके मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र है, इस कारण माता के इस रूप का नाम चंद्रघण्टा पड़ा। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के…

स्नान -दान-श्राद्ध की अमावस्या

स्नान -दान-श्राद्ध की अमावस्या – भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आष्विन मास की प्रति तथा आष्विन मास की अमावस्या तक का समय अपने पितरों तथा पूर्वजो को पूजन, याद करने तथा उनकी मुक्ति हेतु दान करने का होता है। इस माह में किए गए दान एवं पूण्य जीवन में सुख…

चतुर्दषी का श्राद्ध करके पायें जीवन मे आषांतित सफलता

चतुर्दषी का श्राद्ध करके पायें जीवन मे आषांतित सफलता – स्कूल षिक्षा तक बहुत अच्छा प्रदर्षन करने वाला अचानक अपने एजुकेषन में गिरावट ले आता है तथा इससे कैरियर में तो प्रभाव पड़ता ही है साथ ही मनोबल भी प्रभावित होता हैं अतः यदि आपके भी उच्च षिक्षा या कैरियर…

त्रयोदषी का श्राद्ध-षनि प्रदोष

त्रयोदषी का श्राद्ध-षनि प्रदोष  – ज्योतिषषास्त्र में कालपुरूष के जन्मांग में सूर्य हैं राजा, बुध हैं मंत्री, शनि हैं जज, राहु और केतु प्रशासक हैं, गुरू हैं मार्गदर्शक, चंद्रमा हैं मन और शुक्र है वीर्य। जब कभी भी कोई व्यक्ति अपराध करता है तो राहु और केतु उसे दण्डित करने…