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Category: Marital Issues

कैसा होगा आपका जीवन साथी

विवाह योग्य प्रत्येक कन्या के मन में एक बार यह प्रष्न अवष्य जाग्रत होता है कि उसका भावी वर कैसा होगा, क्या करता होगा, कहाॅ से होगा तथा किस स्थिति का होगा तथा उसके साथ व्यवहार कैसा होगा। यह सारी बातें उस कन्या की कुंडली के सप्तम भाव, सप्तमेष तथा…

प्रेम विवाह होगा या नहीं, जानें- विवाह योग के बारे में दिलचस्प तथ्य

प्रेम विवाह के बारे में हर किसी को उत्सुकता रहती है. आइए जानते हैं कि प्रेम विवाह के लिए क्या योग होते हैं और कैसे होगा प्रेम विवाह. प्रेम विवाह हमेशा से ही लोगों की उत्सुकता का विषय रहा है. इसका नाम सुनकर ही अविवाहित लड़का-लड़की के मन मे अनेक…

वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए करें ये उपाय

ग्रह व्यक्ति के जीवन को कई तरह से प्रभावित करते हैं. अलग-अलग ग्रहों का असर लोगों के जीवन पर अलग तरह से पड़ता है. ग्रहों से दांपत्य जीवन भी प्रभावित होता है. ज्योतिष के अनुसार शुक्र और बृहस्पति या दोनों के कमजोर होने से वैवाहिक जीवन में समस्या आती है….

मंगल दोष क्या है और क्यों

ज्योतिष के अनुसार 1,2,4,7,8,12 भाव में मंगल की उपस्थिति मंगल-दोष कही जाती है, जो कि विवाह हेतु कुंडली मिलान में एक महत्वपूर्ण विषय माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में ये दोष दिखे तो, उसके विवाह में विलम्ब, परम्परा और ग्रह जन्य बाधा के कारण तय हैं। ये…

ये 7 चीजें बढ़ाएंगी प्यार, मजबूत होंगे रिश्ते

वैलेंटाइंस डे प्यार और इकरार का दिन है. आज बात करेंगे उन 7 वस्तुओं की जिससे आपका प्रेम दिन प्रतिदिन बहुत ज्यादा बढ़ने लगेगा. सात वस्तुओं के द्वारा आपका प्रेम और बढ़ेगा. आपको आपका सच्चा प्यार उन 7 वस्तुओं का आपके दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा बताएंगे आज… प्रेम…

रिष्तों में प्यार बढ़ाने का ज्योतिषीय उपाय –

ग्रह, नक्षत्र हमारे आपसी रिष्तों पर अपना पूरा प्रभाव डालते हैं। इस संबंध में ज्योतिषषास्त्र में पर्याप्त जानकारी प्राप्त होती है। कुंडली में प्रत्येक ग्रह से कोई ना कोई रिष्ता जुड़ा होता है तथा प्रत्येक भाव से रिष्तेदारो की स्थिति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सूर्य से जहाॅ…

पति-पत्नी के मध्य प्रेम

ऐसा क्या करें कि पति-पत्नी के बीच अहंकार की जगह प्रेम……….., प्रतियोगिता के स्थान पर सानिध्य मिले…………. आज के भौतिक संसार में मनुष्य अध्यात्म को छोड़कर भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है। समय के अभाव ने उसे रिश्तों के प्रति उदासीन बना दिया है। परन्तु आज भी मनुष्य अपने…

कुंडली मिलान का ज्योतिषीय तथ्य

सभी अभिभावक की यह हार्दिक कामना होती है कि उसकी संतान का विवाह समय से हो किंतु उससे प्रमुख कामना होती है कि वह विवाह के उपरांत सुख तथा खुष रहे। इस हेतु भारतीय समाज में कुंडली मिलान का प्रमुख स्थान है। अत्यंत आधुनिक माता भी अपनी संतान के विवाह…

असुरों के गुरू शुक्र ग्रह के अस्त होने पर विवाहादि कार्य क्यूं वर्जित किए जाते हैं ?

असुरों के गुरू शुक्र ग्रह के अस्त होने पर विवाहादि कार्य क्यूं वर्जित किए जाते हैं ? “यत्पिण्डे च ब्राह्मंडे” अर्थात जो कुछ भी इस भौतिक शरीर में मौजूद है, वही इस ब्राह्मंड में भी विधमान है। ये वाक्य कोई परिकल्पना नहीं है, अपितु एक शाश्वत सत्य है। वेद, पुराण…

आपके विवाह के योग कब बनेगा जाने कुंडली विश्लेषण द्वारा

किसी जातक का सामान्य प्रष्न होता है कि उसका विवाह कब होगा। इसकी जानकारी के लिए उस जातक की राषि में सप्तमेष जिस ग्रह में स्थित होता है उसके स्वामी या नवांष में जिस राषि में सप्तमेष स्थित है उसके स्वामी के दषाकाल में शादी का योग बनता है। कारक…

विवाह का समय निर्धारण या विलंब योग को दूर करने का उपाय –

बदले और बदलते हुए परिवेष में विवाह एक चिंता का विषय है। ज्यादातर युवा और उनके अभिभावक कैरियर को प्राथमिकता देते हुए एजूकेषन तथा कैरियर के बारे में तो गंभीर होते हैं कि शादी संबंधी विचार टालते रहते हैं, जिसके कारण विवाह की उचित आयु कब निकल जाती है, पता…

वैवाहिक जीवन मेंं हस्तरेखा का प्रभाव

किसी व्यक्ति का विवाह कब होगा, पत्नी कैसी मिलेगी, दाम्पत्य कैसा रहेगा, ये सारे तथ्य उसकी विवाह रेखा मेंं छिपे होते हैं। यह रेखा उसके जीवन मेंं अहम भूमिका निभाती है। इसे प्रणय रेखा व स्नेह रेखा भी कहते हैं। समाज मेंं एक भ्रांति है कि जितनी संख्या मेंं यह…

नाड़ी दोष और भकूट दोष का व्यवहारिक स्वरूप-

भारतीय ज्योतिष में कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि में मिलाएॅ जाने वाले अष्टकूटों में नाड़ी और भकूट को सबसे अधिक गुण प्रदान किये जाते हैं। नाड़ी को 8 और भकूट को 7 गुण प्रदान किय जाते हैं। मिलान की विधि में यदि नाड़ी…

विवाह में मूहुर्त गणना की उपयोगिता

विवाह संस्कार को भारतीय समाज में एक धर्म का दर्जा दिया गया है, जिसमें दो व्यक्ति का जीवन एक होकर उनका नया जन्म माना जाता है। इस आधार पर देखा जाए तो विवाह के समय शुभ लग्न उसी प्रकार महत्व रखता है, जिस प्रकार जन्म का समय। विवाह का मूहुर्त…

आपके विवाह के योग कब बनेगा जाने कुंडली विश्लेषण द्वारा

किसी जातक का सामान्य प्रष्न होता है कि उसका विवाह कब होगा। इसकी जानकारी के लिए उस जातक की राषि में सप्तमेष जिस ग्रह में स्थित होता है उसके स्वामी या नवांष में जिस राषि में सप्तमेष स्थित है उसके स्वामी के दषाकाल में शादी का योग बनता है। कारक…

कुंडली से जाने विवाह समय

किसी जातक का सामान्य प्रष्न होता है कि उसका विवाह कब होगा। इसकी जानकारी के लिए उस जातक की राषि में सप्तमेष जिस ग्रह में स्थित होता है उसके स्वामी या नवांष में जिस राषि में सप्तमेष स्थित है उसके स्वामी के दषाकाल में शादी का योग बनता है। कारक…

पति-पत्नी वाद-विवाद का ज्योतिष कारण

आज के भौतिकवादी एवं जागरूक समाज में पति-पत्नी दोनों पढ़े लिखे होते हैं और सभी अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग होते हैं। परन्तु सामान्य सी समझ की कमी या वैचारिक मतभेद होने पर मनमुटाव होने लगता हैं। शिक्षित होने के कारण सार्वजनिक रूप से लड़ाई न होकर पति-पत्नी…

विवाह के बाद भटकाव क्यू??

आज समाज में व्यक्ति के आत्मकेन्द्रित हो जाने से परिवार के अन्दर स्नेहसूत्र का डोर कमजोर होता जा रहा है और इस स्नेहसूत्र की मुख्य कड़ी वैवाहिक रिष्तों की डोर टूटकर कहीं बिखरती जा रही है। सामाजिकता के प्रभावहीन हो जाने के कारण मनुष्य निरन्तर अकेला होता जा रहा है…

सप्तम भाव के ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति से बाधित वैवाहिक जीवन

सप्तमभाव लग्न कुंडली में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लग्न से सातवाॅ भाव ही दांपत्य व विवाह का ग्रह माना जाता है। इस भाव एवं इस भाव के स्वामी के साथ स्थिति ग्रहों की स्थिति और दृष्टि संबंध के अनुसार जातक का वैवाहिक जीवन के सुख-दुख का निर्धारण किया जाता…

नाड़ी दोष और भकूट दोष का व्यवहारिक स्वरूप

भारतीय ज्योतिष में कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि में मिलाएॅ जाने वाले अष्टकूटों में नाड़ी और भकूट को सबसे अधिक गुण प्रदान किये जाते हैं। नाड़ी को 8 और भकूट को 7 गुण प्रदान किय जाते हैं। मिलान की विधि में यदि नाड़ी…

अष्टकूटों द्वारा कुंडली मिलान कितना औचित्यपूर्ण?

भारतीय परंपरा में विवाह संस्कार एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। विवाह जीवन का एक आवश्यक अंग है, जिसके द्वारा सामाजिक परंपरा का निर्वाह तथा जीवन सुचारू रूप से चलायमान होता है। विवाह- निर्णय के लिए वर-वधू मेलापक ज्ञात करने की विधि अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय समाज में ऐसी मान्यता…